लखीमपुर खीरी। 108, 102 एंबुलेंस सेवा में फर्जीवाड़े के आरोप की गूंज तेज हो गई है। एक केस पर एबुलेंस कंपनी को सरकार से चार हजार रुपये मिलते हैं। ऐसे में प्रत्येक एबुलेंस चालक व एमटी को रोज 25 से 30 केस करने का टारगेट मिल रहा है। जो टारगेट पूरा नहीं कर पाता है, उसको नौकरी से निकाल दिया जाता है। मजबूरी में कर्मचारी गड़बड़ी करते हैं। सेवा से बर्खास्त कर्मचारियों ने शासन-प्रशासन में शिकायत कर यह गंभीर आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है।
निकाले गए कर्मचारी कैप्टन संदीप बाबू, पंकज कुमार, अतुल कुमार आदि ने शासन के साथ ही डीएम को संबोधित शिकायती पत्र एसडीएम को सौंपा है। कहा कि एंबुलेंस सेवा प्रदाता जीवीके कंपनी कर्मचारियों पर केस बढ़ाने का दबाव बनाती है। ऐसा न करने पर नौकरी से निकाल दिया जाता है। मजबूरन कर्मचारी फर्जी आंकड़ा पीसीआर पर चढ़ाते हैं।
सबसे ज्यादा फर्जी केस हॉस्पिटल से घर जाने वाले मरीजों के नाम पर किया जाता है। दर्ज होने वाले अधिकांश मोबाइल नंबर फर्जी मिलेंगे। एक ही मरीज को कई बार अस्पताल में दिखाया जाता है। अस्पताल के रजिस्टर में मरीज कब आया है, उसका मिलान किया जाए तो लगभग फर्जी मिलेंगे।
कर्मचारियों ने जांच कराकर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की। कैप्टन संदीप बाबू ने बताया कि जिले के 100 कर्मचारी ऐसे हैं, जो गड़बड़ी का विरोध करते थे, जिनको कंपनी ने निकाल दिया है।
जिले में 90 एबुलेंस, 360 कर्मी हैं तैनात
जनपद में 108, 102 की 90 एबुलेंस हैं। इसमें चार एबुलेंस एलएस हैं। यह एबुलेंस मरीजों को अस्पताल लाने और ले जाने का काम करती हैं। 90 एबुलेंस में करीब 360 कर्मचारी तैनात है। एक एबुलेंस में चालक और एमटी यानी दो कर्मचारी होते हैं। प्रत्येक टीम 12 घंटे की ड्यूटी करती है।
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शिकायत करने वाले सेवा से बर्खास्त कर्मचारी हैं, जो गलत तरीके से आरोप लगा रहे हैं। एबुलेंस में किसी भी प्रकार का फर्जी डाटा नहीं चढ़ाया जाता है।
-शिवेंद्र कुमार, जिला प्रभारी, 108, 102 एबुलेंस सेवा