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लखीमपुर खीरी: बाड़े से आजाद होंगे चार गैंडे, रिहाई इसी साल

Tue, 21 Feb 2023 12:41 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
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दुधवा नेशनल पार्क के गैंडा पुनर्वासन क्षेत्र में शिशु के साथ मादा गैंडा
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लखीमपुर खीरी। गैंडा पुनर्वासन योजना के तहत सौर ऊर्जा चालित बाड़ में रहने वाले गैंडों को जंगल में स्वच्छंद विचरण के लिए आजाद करने की योजना को अंतिम रूप दे दिया गया है। पहले चरण में चार गैंडों को आजाद करने की योजना है। हालांकि, इस साल के अंत तक ही गैंडों को आजादी मिल सकेगी। गैंडों को जंगल में आजाद करने के पहले वनाधिकारियों और वनकर्मियों को विधिवत प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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गैंडों को जंगल में स्वच्छंद विचरण के लिए आजाद करने के संबंध में सोमवार उच्चस्तरीय वर्चुअल बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता प्रधान मुख्य वन संरक्षक और विभागाध्यक्ष ममता संजीव दुबे, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक सुनील चौधरी, असम के गैंडा विशेषज्ञ विशन सिंह वोनाल, अमित शर्मा, पूर्व फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक, मौजूदा फील्ड डायरेक्टर बी प्रभाकर और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी डॉ. मुदित गुप्ता शामिल रहे।
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर बी. प्रभाकर ने बताया कि बैठक में पहले चरण में चार गैंडों को सौर ऊर्जा से चालित बाड़ से आजाद कर जंगल में स्वच्छंद विचरण करने के लिए छोड़े जाने पर सहमति बनी है। जंगल में छोड़े जाने वाले इन गैंडों को जल्द ही चिह्नित कर उनके स्वास्थ्य और स्वभाव पर पैनी नजर रखी जाएगी। आजाद करने के पहले इन्हें रेडियो कॉलर लगाया जाएगा, ताकि इनकी लोकेशन और गतिविधियों पर नजर रखी जा सके।
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इससे पहले वनाधिकारियों और वनकर्मियों को गैंडा विशेषज्ञ गैंडों को जंगल में छोड़ने, कॉलर आईडी लगाने और गैंडों की गतिविधियों पर नजर रखने, जरूरत पड़ने पर बेहोश करने का विधिवत प्रशिक्षण देंगे। ताकि वनकर्मी गैंडों को लेकर किसी भी स्थिति से निबटने के लिए पूरी तरह तैयार रहें। जल्दी ही विशेषज्ञों का एक अध्ययन दल दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगल का सर्वे कर यह पता लगाएगा कि गैंडों को जंगल के किस क्षेत्र में छोड़ना उपयुक्त होगा।
गैंडों को आजाद करने से पहले जंगल के आसपास बसे ग्रामीणों को विश्वास में लेकर उनसे भी समन्वय स्थापित किया जाएगा। ग्रामीणों को गैँडों के संरक्षण के प्रति भी जागरूक किया जाएगा।

चालीस साल बाद गैंडों को मिलने वाली है आजादी
दुधवा नेशनल पार्क में गैंडा पुनर्वासन योजना वर्ष 1984 में शुरू हुई थी। तब से अब तक गैंडे सौर ऊर्जा चालित बाड़ में रहते आए है। कुछ साल पहले गैंडा पुनर्वासन योजना फेज-2 शुरू की गई थी। दोनों फेज में मिलाकर करीब 45 गैंडे हैं। करीब 40 साल बाद इन गैंडों को बाड़ से आजाद करने की योजना बनी है।

दुधवा टाइगर रिजर्व में चल रही गैंडा पुनर्वासन योजना के तहत चार गैंडों को चिह्नित कर उन्हें बाड़ से निकालकर खुले जंगल में विचरण के लिए आजाद करने की तैयारी शुरू हो गई है। इस साल के अंत तक इन गैँडों को कॉलर आईडी लगाने के बाद खुले जंगल में छोड़ा जाएगा।
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- बी प्रभाकर, फील्ड डायरेक्टर दुधवा टाइगर रिजर्व
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