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Lakhimpur Kheri News: दुधवा नेशनल पार्क की जमीन कब्जाने में पूर्व कांग्रेस विधायक सतीश अजमानी को दो साल की कैद

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पूर्व विधायक सतीश अजमानी
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लखीमपुर खीरी। दुधवा नेशनल पार्क की वन भूमि पर अवैध अतिक्रमण करने और वन्यजीवों के प्राकृतवास में हस्तक्षेप करने के मामले में एसीजेएम मोना सिंह ने पलिया निवासी पूर्व विधायक सतीश अजमानी सहित तीन अतिक्रमण कारियों को दोषी पाया है। अदालत ने पूर्व विधायक को दो साल के कारावास और बीस हजार पांच सौ रुपये जुर्माना भरने की सजा सुनाई है। उनके साथियों को एक वर्ष के कारावास और दस हजार पांच सौ रुपये का जुर्माना भरने की सजा सुनाई है।
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अभियोजन पक्ष रखते हुए एडीजीसी कपिल कटियार ने बताया कि 1986 में दुधवा नेशनल पार्क के डिगनिया कंपार्टमेंट में अवैध रूप से वन भूमि पर कब्जा करते हुए तत्कालीन विधायक सतीश अजमानी ने आवास और दुकानें बनवाई थीं। दुकानों को अन्य लोगों को पट्टे पर दे दिया गया था। टांसपोर्ट कंपनी भी वन भूमि पर संचालित की थी। वन भूमि पर किसी प्रकार की मानव व वाणिज्यिक गतिविधियों पर लगाम लगाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट का फैसला दिसंबर 1996 में आने के बाद गौरीफंटा के वन रेंज अधिकारी ने तीन अप्रैल 1997 को पूर्व विधायक से कब्जा हटाने को कहा था।
कब्जा हटाने के बजाय पूर्व विधायक सतीश अजमानी ने दुकानें और आवास अपने साथी सुनील कुमार निवासी पलिया और मुन्नालाल निवासी गौरीफंटा मंडी और ललित ग्रोवर को किराये पर दे दिया। वन विभाग ने कई नोटिस भेजे, लेकिन कब्जा नहीं हटाया गया। इसके बाद केस करते हुए दुधवा नेशनल पार्क के उप निदेशक और वन क्षेत्राधिकारी गौरीफंटा रेंज ने अदालत में वर्ष 1998 में परिवाद दाखिल किया था।
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सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से महेंद्र मिश्र, सियाराम मिश्र, राजेश निगम, और जमुनादीन त्यागी की गवाही पेश की गई थी, तो बचाव पक्ष में स्वयं पूर्व विधायक सतीश अजमानी ने दुधवा नेशनल पार्क के अधिकारियों द्वारा 1978 में दिए गए मूलपत्र के साथ वन विभाग की ओर से जारी की गई किराए की रसीदें दाखिल करते हुए खुद को निर्दोष बताया था।
सुनवाई के दौरान ललित ग्रोवर के लगातार फरार चलने के कारण अदालत ने उसकी फाइल अलग करते हुए पूर्व विधायक सतीश अजमानी के साथ ही मुन्नालाल और सुनील कुमार के मामले का निस्तारण शुरू कर दिया। दोषसिद्ध होने के बाद जब पूर्व विधायक ने अपनी आयु 77 वर्ष से अधिक बताते हुए प्रोबेशन पर छोड़ने और प्रथम अपराध की बात कही। वन विभाग के अधिवक्ता नवीन गुप्त, संजय राय और राकेश श्रीवास्तव ने वन अधिनियम की बारीकियां अदालत में बताईं। कहा कि वन अपराध में प्रोबेशन अथवा नरमी बरते जाने संबंधी राहतकारी उपाय नहीं दिए जा सकते हैं।
एमपी-एमएलए के मामलों के अभियोजक के रूप में एडीजीसी कपिल कटियार ने कहा कि जनप्रतिनिधि पर कानूनी प्रावधानों के अनुपालन की जिम्मेदारियां थीं, लेकिन उन्होंने ही कानून तोड़ा है। इसलिए सख्त सजा दी जाए। इस पर एसीजेएम मोना सिंह ने सतीश अजमानी को दो वर्ष के कारावास और बीस हजार पांच सौ रुपये के जुर्माना की सजा सुनाई है। साथियों सुनील कुमार और मुन्नालाल को एक वर्ष के कारावास और दस हजार पांच सौ रुपये के जुर्माना की सजा सुनाई है। सतीश अजमानी प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव और एआईसीसी सदस्य भी रह चुके हैं। कब्जा करने के समय सतीश अजमानी निघासन विधानसभा क्षेत्र से विधायक थे।
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