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Lakhimpur Kheri News: एक तो मानदेय कम, उसके बाद भी परीक्षाओं का बोझ

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लखीमपुर खीरी। जिले में संचालित 3106 परिषदीय स्कूलों में अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं चल रहीं हैं। परीक्षा कराने को लेकर विभाग ने किसी तरह का कोई बजट नहीं दिया है। प्रधानाचार्य अपने बजट से परीक्षाएं कराने को मजबूर हैं। सबसे ज्यादा परेशानियां शिक्षामित्रों को हो रहीं हैं। शिक्षामित्रों का कहना है कि एक तो कम मानदेय मिलता है। उसके बाद इस तरह से बोझ डालना हितकारी नहीं।
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मौजूदा समय में परिषदीय स्कूलों में अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं चल रहीं हैं। 31 से परीक्षाओं की शुरूआत होनी थी, लेकिन अवकाश होने के कारण परीक्षाएं एक से शुरू हो सकीं। परीक्षाओं को लेकर विभाग ने किसी तरह का कोई मद नहीं दिया। अध्यापकों को अपने पास से ही परीक्षा संपन्न कराने के निर्देश दिए गए थे। आदेश मिलने के बाद कुछ अध्यापक अपने पास से परीक्षा की कापियां और प्रश्नपत्रों का इंतजाम करते हुए परीक्षाएं करा रहे हैं। वहीं कुछ ने सारा खर्च उठाने से मना किया, इसके बाद चंदा लगाकर परीक्षा कराई जा रही हैं। इसमें सबसे ज्यादा दिक्कत शिक्षामित्रों और अनुदेशकों काे हो रही हैं।
नाम न छापने की शर्त पर एक शिक्षामित्र ने बताया कि विभाग काम तो अध्यापकों के बराबर ले रहा है, लेकिन वेतन में काफी अंतर है। दस हजार रुपये के मानदेय पर काम करने के बाद परिवार का खर्चा चला पाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में इस अतिरिक्त बोझ ने घर का बजट बिगाड़ दिया है।
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ऐसा ही कुछ हाल अनुदेशकों का भी है। शहर में पूरे स्कूल का जिम्मा संभाले एक महिला शिक्षामित्र ने बताया कि स्कूल के स्टाफ से चंदा मिलाकर किसी तरह से कापियों का इंतजार किया गया है। प्रश्न ब्लैक बोर्ड पर लिखकर कापियों पर बच्चों से उत्तर लिखवाए जा रहे हैं। अभी दो दिन परीक्षा शेष है। कहा कि पहले विभाग की तरफ से बजट मिल जाता था, लेकिन दो सालों से एक भी रुपया नहीं मिला है। इससे परेशानियां बढ़ गई हैं।
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