रविवार को भारी पुलिस फोर्स की मौजूदगी में करीब 11 बजे मतदान शुरू हुआ। दोपहर 12 बजे खम्हरिया की बीडीसी कमला देवी ने वोट डालने के बाद वापस आकर भाजपा नेताओं को बताया कि चुनाव अधिकारी ने वोट हेल्पर के जरिये डलवा दिया जबकि उन्होंने हेल्पर की मांग ही नहीं की थी। चौबियापुर की बीडीसी रामवती ने भी बाहर आकर यही बताया। इससे भाजपाई उत्तेजित हो गए। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष विनोद मिश्रा, लोकेंद्र प्रताप सिंह, पूर्व विधायक अरविंद गिरि, संदीप मेहरोत्रा ने एसडीएम से पूछा कि जब मतदाताओं ने हेल्पर मांगे ही नहीं तो हेल्पर क्यों वोट डाल रहे हैं। मतदान समाप्त होने के पूर्व जमुनिया की बीडीसी सदस्य ललिता देवी वोट डालने आई, लेकिन उसके पास प्रमाण पत्र नहीं था। इसको लेकर भाजपा और सपा नेताओं में नोकझोंक शुरू हो गई। इसी बीच दूसरे पक्ष की ओर से 26 प्रत्याशियों की सूची हेल्पर की मांग को लेकर दिए जाने की चर्चा उड़ी। इस पर हंगामा और बढ़ गया। हंगामे की जानकारी पर एसडीएम मितौली शादाब असलम और एसओ पसगवां अनिल शाही फोर्स के साथ आ गए। भाजपाइयों ने पुलिस और प्रशासन विरोधी नारे लगाए। पूर्व विधायक अरविंद गिरि की एसओ से नोकझोंक भी हो गई। भाजपाइयों के तेवर देख पुलिस और प्रशासन अधिकारी बैक फुट पर आ गए। बताया गया कि हेल्पर के लिए 26 लोगों की कोई सूची नहीं आई है। बिना मांगे किसी को सहयोगी को वोट नहीं दिया जाएगा। तब जाकर मामला शांत हुआ। पसगवां ब्लाक के चुनाव अधिकारी डा. अखिलेंद्र दुबे ने बताया कि हेल्पर मांगे जाने की कोई सूची नहीं दी गई थी। दो लोगों ने पहले हेल्पर मांगा था तब उन्हें सहयोगी उपलब्ध कराया गया। तीसरे सदस्य का आधार कार्ड देखकर वोट डलवाया गया। ये नियम में है।