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आशंका : कहीं जहर से तो नहीं हुई तेंदुए की मौत

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बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व के कतर्निया घाट वन्यजीव प्रभाग से सटे धौरहरा तहसील क्षेत्र में तेंदुओं की बड़ी आबादी खेतों, बागों और नदी किनारे रह रही है। आए दिन तेंदुए इंसानों और पालतू जानवरों पर हमला करते हैं। आशंका जताई जा रही है कि बृहस्पतिवार को मृत मिला तेंदुआ किसी इंसानी हरकत का शिकार तो नहीं हो गया। क्योंकि यहां पहले ऐसा हो चुका है।
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दुधवा टाइगर रिजर्व के धौरहरा क्षेत्र में बाघों के बजाय तेंदुओं से इंसानी संघर्ष होता रहा है। इस संघर्ष में कई इंसानों को जान गंवानी पड़ी तो कई तेंदुए भी गुस्से का शिकार हो चुके हैं। करीब बीस साल पहले कई पशुओं को निवाला बनाने वाले और इंसानों को घायल करने वाले तेंदुए को ग्रामीणों ने पीट-पीटकर अधमरा कर दिया था। बाद में झोंपड़ी में बंद कर उसे जिंदा जला दिया था। इसके बाद भी इस क्षेत्र में कई तेंदुओ की मौत हो चुकी है। कई इंसान भी तेंदुओं के हमले में घायल हुए या मारे गए।
ऐसे में इस बात की भी आशंका की जा रही है कि तेंदुए के किए गए शिकार पर किसी ने जहर डाल दिया हो, जिसे खाने से उसकी मौत हो गई। ऐसी भी आशंका जताई जा रही है कि लगातार जंगल से बाहर रहने और पालतू जानवरों के संपर्क में आने से तेंदुआ किसी संक्रमण का शिकार हुआ हो। फिलहाल विसरा रिपोर्ट पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
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धौरहरा इलाके में एक नर तेंदुए का शव मिला था। पोस्टमार्टम से उसकी मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका। हो सकता है कि उसकी मौत किसी बीमारी से हुई हो। विसरा की जांच से कारण का पता चलने की उम्मीद है।
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- ललित कुमार वर्मा, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
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