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Lakhimpur Kheri News: अधिग्रहण के विरोध में टंकी पर चढ़े किसान... सात घंटे चला हंगामा

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लखीमपुर खीरी। जमीन अधिग्रहण के विरोध में राजापुर गांव के किसान विलोबी हॉल के पास पानी की टंकी पर चढ़े गए। सात घंटे तक हंगामा चला। सीडीओ अनिल कुमार सिंह, एडीएम संजय कुमार सिंह और आवास विकास परिषद के एक्सईएन उमानाथ शुक्ला ने काफी मान मनौव्वल की। अधिग्रहण प्रोजेक्ट निरस्त करने की बात पर सहमति बनी और किसान टंकी ने नीचे उतरे।
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शुक्रवार की सुबह करीब सात बजे गांव राजापुर के 70 से अधिक किसान विलोबी हॉल के सामने ओवरहेड टैंक के पास पहुंचे। 20 से अधिक किसान टंकी के ऊपर चढ़ गए और बाकी नीचे बैठकर विरोध-प्रदर्शन करने लगे। किसानों का कहना था कि वर्ष 2010 के आवास विकास परिषद के प्रोजेक्ट में उनकी जमीन का गलत तरीके से अधिग्रहण किया जा रहा है। करीब 14 वर्षों से समस्या के समाधान के लिए दौड़ रहे किसान उस समय भड़क गए, जब जमीन की खतौनी पर आवास विकास परिषद का नाम दर्ज हो गया। किसान टंकी परिसर में जमा हुए और कई किसान टंकी पर चढ़ गए।
पता चला तो राजापुर मंडी में योगाभ्यास छोड़कर अफसर पहुंचे। एसडीएम सदर श्रद्धा सिंह, सीओ रमेश तिवारी, कोतवाली प्रभारी अंबर सिंह और अन्य अधिकारी किसानों को मनाने में जुटे। आनन-फानन आवास विकास परिषद के अधिकारियों से संपर्क किया गया। दोपहर 12 बजे के बाद सीडीओ अनिल कुमार सिंह, एडीएम संजय कुमार सिंह, एक्सईएन आवास विकास पहुंचे। किसानों से वार्ता शुरू हुई।
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मुआवजा बढ़ाने की बात भी कही गई, लेकिन किसान राजी नहीं हुए। प्रोजेक्ट निरस्तीकरण की मांग पर अड़े रहे। बाद में अधिकारियों ने प्रोजेक्ट निरस्तीकरण की प्रक्रिया और अगले सप्ताह सभी किसानों को अलग-अलग प्रत्यावेदन देने की बात पर राजी कर लिया। इन प्रत्यावेदन को आवास विकास परिषद बोर्ड के समक्ष रखा जाएगा। दोपहर 2:30 बजे सभी किसान टंकी से नीचे उतर आए। किसानों के नीचे आने के बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली।
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यह है पूरा मामला
वर्ष 2010 में आवास विकास परिषद ने राजापुर- एलआरपी मार्ग प्रोजेक्ट के लिए गृहस्थान योजना के तहत किसानों की जमीन का अधिग्रहण शुरू किया। इस प्रोजेक्ट में 117 हेक्टेयर (करीब 317 एकड़) जमीन की आवश्यकता थी। दर का निर्धारण 17.91 रुपये वर्ग फुट तय किया गया। प्रोजेक्ट की शुरुआत से किसान नाराज थे। जमीन देने का विरोध किया और जिला स्तरीय अधिकारियों, आवास विकास परिषद के अधिकारियों से शिकायत की, मगर कहीं सुनवाई नहीं हुई।

किसानाें की मांग है कि उनकी जमीनें छोड़ी जाएं। किसान बुधवार को अलग-अलग प्रत्यावेदन देंगे। प्रत्यावेदन को बोर्ड के सामने रखा जाएगा। किसानों के हित में निर्णय कराने का प्रयास किया जाएगा। योजना 2010 में बनी थी। 2017 में शासन से स्वीकृति मिली। वर्ष 2020 में लागू हुई है।
- उमानाथ शुक्ला, अधिशाषी अभियंता, आवास एवं विकास परिषद
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किसानों का कहना है कि जमीन अधिग्रहण से वह भूमिहीन हो जाएंगे। इसको लेकर प्रत्येक किसान से अलग-अलग आवेदन लिया जाएगा। जिसे आवास विकास परिषद बोर्ड में रखा जाएगा। किसानों के हित में जो भी होगा कराया जाएगा। किसानों के पांच सदस्यीय दल ने आवास आयुक्त से मुलाकात की बात भी कही है।
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- अनिल कुमार सिंह, प्रभारी डीएम/ सीडीओ
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