पलियाकला। शारदा नदी की बाढ़ में डूबे कई गांवों के दर्जनों किसानों और बाढ़ पीड़ितों ने राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के बैनर तले सिनेमा चौराहे पर शनिवार को धरना दिया। सड़क जाम कर हंगामा काटा। किसानों का आरोप था कि जब रेल लाइन कट रही थी, तब रेलवे के अधिकारियों से बचाव नहीं किया। रेललाइन कटने से गांव जलमग्न हो गए। किसानों ने खनन को भी बाढ़ का कारण बताया है। जल्द रेललाइन बनवाने के साथ ही फसलों के मुआवजे की मांग की।
शारदा नदी की बाढ़ से डूबने की कगार पर पहुंचे किसानों और बाढ़ पीड़ितों का गुस्सा रेलवे व खनन करने वालों के खिलाफ फूटा। प्रशासन पर भी मझगईं क्षेत्र के गांवों में लंच पैकेटों का वितरण न करने का आरोप लगाया। सड़क जाम की सूचना पर तहसीलदार आरती यादव दलबल के साथ मौके पर पहुंची और किसानों को समझाया व लिखित शिकायत देने को कहा।
इसके बाद किसानों ने एसडीएम को शिकायतीपत्र दिया है। कहा है कि रेललाइन कटने से रेलवे फाटक के पूरब की तरफ के कई गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया। हजारों एकड़ फसलें बर्बाद हो गईं। राजमार्ग प्रभावित होने से रोजमर्रा की जरूरी चीजें नहीं मिल पा रही हैं। रेलवे पर आरोप लगाया कि लाइन कटने से पूर्व ही ग्रामीणों ने रेलवे को आगाह कर पत्थर व बोल्डर आदि भेजने को कहा था। अगर रेलवे पत्थर भेज देता तो हालात इतने बुरे नहीं होते।
ज्ञापन में पलिया-भीरा के बीच कटी रेललाइन और सड़क की मरम्मत कराने, वाहनों का आवागमन शुरू कराने की मांग की गई है। इस दौरान संगठन के तहसील अध्यक्ष तरसेम सिंह, तेजिंदर सिंह तेजी, रामकुमार, अवतार सिंह, अमरजीत सिंह, बलवीर सिंह, कमरदीप कुमार, हरिंदर सिंह, विक्रम सिंह, इकबाल सिंह समेत भारी संख्या में किसान व बाढ़ पीड़ित मौजूद रहे।