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Lakhimpur Kheri News: सजा पूरी होने के बाद भी एक चूक ने कटवाई सात महीने की जेल

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जिला जेल से रिहा हुआ बंदी राजनरायण रामू
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लखीमपुर खीरी। पुलिस और खुद की एक चूक ने एक अपराध की पूरी सजा काटने के बाद रिहा हुए राजनरायन को फिर सात महीने की जेल कटवा दी। मामला खुलने पर आनन-फानन सुनवाई कर उसे रिहा करने के आदेश दिए गए। शासकीय अधिवक्ता डॉ. विजय सिंह के माध्यम से आदेश की जानकारी मिलते ही जिला जेल प्रशासन ने शुक्रवार को बंदी राजनरायन की रिहाई कर दी है।
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 दरअसल सजा के दौरान हाईकोर्ट में की गई अपील उन्होंने वापस नहीं ली। इधर पुलिस ने भी उनके बारे में जानकारी नहीं दी। लिहाजा तारीख पर तारीख के बाद पेश न होने पर वारंट जारी हुआ तो सजा काट कर जेल से निकले राजनरायन को पुलिस ने एक बार फिर जेल भेज दिया। सात महीने बाद मामला खुला तो अब आनन फानन उसकी रिहाई की कवायद हुई।

यह था मामला

शहर के मुहल्ला गोकुलपुरी के रहने वाले राजनरायन उर्फ रामू के खिलाफ उसकी किरायेदार रही युवती ने 1994 में दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सुनवाई के बाद एफटीसी जज चंद्रहास राम सरोज ने आठ अक्तूबर 2003 को राजनरायन उर्फ रामू को सात साल की सजा सुनाई थी। उसके भाई राजेंद्र नाथ ने हाईकोर्ट लखनऊ में सजा के खिलाफ अपील की लेकिन इस याचिका पर सुनवाई नहीं हुई। कानूनी पैरवी के लिए अपने हिस्से का आधा मकान भी बेच डाला था। तब तक राजनरायन उर्फ रामू को केंद्रीय कारागार बरेली भेजा जा चुका था। वहां 7 साल की सजा काटने के बाद 14 मार्च 2009 को वह छूटा और मकान में अपने बचे हुए हिस्से को भी बेचकर दूसरी जगह रहने लगा।
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नोटिस में पुलिस ने लिखा, गायब है राजनरायन

इधर, हाईकोर्ट में केस की सुनवाई आठ साल बाद जब 15 नवंबर 2022 को जस्टिस सरोज यादव के सामने आई तो फिर बहस के लिए राजनरायान के वकील नदारद थे। वहीं, इससे पहले नोटिस के जवाब में पुलिस ने भी लिखा था कि राजनरायन 2014 में ही मकान बेचकर गायब हो गया है। पुलिस के इस जवाब के बाद अदालत का माथा ठनका तो उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट के साथ ही कुर्की के आदेश दिए थे। सीजेएम को लिखापढ़ी करते हुए गिरफ्तारी के आदेश दिए थे। इसके बाद पुलिस ने राजनरायन को फिर जेल भेज दिया गया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भी लिखा था पत्र
जेल प्रशासन की ओर से इस मामले में 13 मई 2023 को लोगों को निशुःल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने वाले प्राधिकरण को प़त्र लिखा था और मामले में त्वरित कार्यवाही का अनुरोध किया था मगर यहां भी जेल प्रशासन का पत्र ठंडे बस्ते में चला गया।
डिप्टी रजिस्ट्रार ने भी कर दी अनसुनी

हाईकोर्ट के आदेश पर जब सीजेएम अदालत ने 13 दिसबंर 2022 को राजनरायन को जेल भेज दिया तो अगले ही दिन जेल प्रशासन ने पत्र लिखते हुए सीजेएम कोर्ट में अवगत कराया था कि बंदी राजनारायन तो पहले ही इस मामले की पूरी सजा काट चुका है। 15 दिसंबर 2022 को ही सीजेएम अशोक कुमार ने हाईकोर्ट के उपनिबंधक को पत्र लिखते हुए पूरे प्रकरण से अवगत कराया था, बाद में भी कई बार रिमाइंडर लिखे गए लेकिन हाईकोर्ट से कोई जवाब न आया।
पहले भी हुए ऐसे मामले

एक नेपाली महिला जूठी की 2011 में भारत-नेपाल सीमा के गौरीफंटा बॉर्डर से चरस की बरामदगी के साथ गिरफ्तार किया था। वह लगातार जेल में बंद रही। 31 मार्च 2014 को एडीजे हमीदुल्ला ने उसे दस सालों की सजा सुनाई थी। जिसके बाद हाईकोर्ट में उसकी अपील पर सुनवाई शुरू की थी। वह लगातार जेल में थी लेकिन हाईकोर्ट ने उसके वकील की गैरहाजिरी के चलते बंदी जूठी को गिरफ्तार करने का आदेश दिया था। गैर जमानती वारंट पर सीजेएम ने उसकी गिरफ्तारी के लिए गौरीफंटा पुलिस को लिखा तो वहां से बताया गया कि जूठी के पते में लिवांग जिला रोलपा नेपाल का पता लिखा है। इसलिए उसकी गिरफ्तारी के लिए दूतावास को लिखा जाए। इस पत्राचार के बीच किसी ने नहीं बताया कि जूठी जेल में बंद है।
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