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सोशल मीडिया के विकल्पों से हो व्यक्तिगत कौशल का विकास

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आर्यकन्या डिग्री कॉलेज में संस्कृत कार्यशाला के दौरान तकनीकी सत्र का आयोजन
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संस्कृत भाषा के संबंध में तकनीकी जानकारी दी, शोधार्थियों ने विभिन्न विषयों पर पढ़े शोध पत्र
लखीमपुर खीरी। आर्यकन्या महाविद्यालय में संस्कृत विभाग और संस्कृत साहित्य परिषद की ओर से चल रही संस्कृत कार्यशाला के तीसरे दिन तकनीकी सत्र में शोध पत्र के बारे में जानकारी दी गई। मुख्य अतिथि कौशल विकास कॅरियर काउंसलर के एडिशनल डायरेक्टर डॉ. डीके वर्मा ने कहा कि स्वयं को इतना योग्य बनाओ कि आपको पैसे के पीछे नहीं बल्कि पैसे को आपके पीछे भागना पड़े। पहले सत्र का संचालन अर्चना सिंह एवं दूसरे का संचालन डॉ. रीता सिंह ने किया। दोनों सत्रों के प्रथम चरण में प्रायोगिक तौर पर संस्कृत भाषा के संबंध में तकनीकी जानकारी दी गई। इसके बाद संबंधित विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। डॉ. सुशीला सिंह ने विकिपीडिया एवं इंटरनेट शीर्षक पर तो सुनीता दीक्षित ने हिंदी भाषा अध्यापन में प्राविधि उपकरणों के प्रयोग विषय पर शोध पत्र वाचन किया। शिल्पी तिवारी ने संस्कृत शिक्षण में सोशल मीडिया का योगदान, पायल रॉय ने भाषा शिक्षण विधियां एवं प्रयोग, फरहीन बानो ने शिक्षा के क्षेत्र में यूट्यूब का प्रयोग, अर्चना सिंह ने भाषा प्रयोगशाला के महत्व एवं प्रासंगिकता और ज्योत्सना पांडे ने यूट्यूब का प्रयोग, अपलोडिंग एवं डाउन लोडिंग, डॉ. गीता शुक्ला ने एंड्राइड एप, शिवा देवी अवस्थी ने यूट्यूब का प्रयोग करके व्यक्तिगत कौशल कैसे बढ़ाएं विषय पर अपने शोध पत्र का वाचन किया। दूसरे सत्र में छात्रा पूजा वाजपेई, शिवा देवी, वैशाली, शालिनी शुक्ला और पूजा जायसवाल ने यम नचिकेता संवाद पर लघु नाटिका पेश की। इस मौके पर डॉ. नवलता, डीएस कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य दयानंद शुक्ल, डॉ. माधव चतुर्वेदी, सुभाष चन्द्र, हरिप्रकाश त्रिपाठी, डॉ. बीना रानी गुप्ता, डॉ. शशिप्रभा वाजपेई , डॉ. सुशीला सिंह, शिल्पी तिवारी, अर्चना सिंह, रीता सिंह आदि रहे।
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