विश्व पर्यटन दिवस पर विशेष
पलियाकला। दुधवा नेशनल पार्क जिले का प्रमुख पर्यटन केंद्र है। ये क्षेत्र की जैव विविधता को निर्धारित करने के साथ-साथ सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करता है। दुधवा का पर्यटन सत्र नवंबर में सैलानियों के लिए खोला जाता है। अनेक बदलावों और शुल्क में कमी से पर्यटन को काफी बढ़ावा मिला है। नतीजतन दुधवा में साल दर साल सैलानियों की संख्या बढ़ती जा रही है। साथ ही पार्क का राजस्व भी बढ़ रहा है।
पार्क अधिकारियों की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, पर्यटन सत्र 2020-21 में दुधवा में 20772 देशी और नौ विदेशी सैलानी पहुंचे थे। उस साल पार्क ने 35 लाख सात हजार 201 रुपये का राजस्व प्राप्त किया था। पर्यटन सत्र 2021-22 में दुधवा का जंगल घूमने के लिए 29179 देशी और 47 विदेशी सैलानी पहुंचे थे, जिससे दुधवा को 55 लाख 28 हजार 815 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। 2022-23 के पर्यटन सत्र में दुधवा में 26730 देशी और 1601 विदेशी सैलानियों के पहुंचने से राजस्व एक करोड़ 45 लाख 16 हजार 127 रुपये पहुंच गया। पर्यटन सत्र 2023-24 में पार्क का भ्रमण करने के लिए 51 हजार 11 देशी और 334 विदेशी सैलानी पहुंचे। इससे पार्क ने एक करोड़ 39 लाख 73 हजार 240 रुपये का राजस्व 15 नवंबर 2023 से 25 जून 2024 तक प्राप्त किया।
शुल्क में कमी से बढ़ी सैलानियों की संख्या
पर्यटन सत्र 2023-24 में दुधवा में घूमने, ठहरने आदि पर शुल्क घटाया गया था। इसका परिणाम यह हुआ कि यहां पर्यटन में इजाफा हुआ और सैलानियों की संख्या में खासा बढ़ोतरी देखने को मिली। पार्क सूत्रों की मानें तो पर्यटन के लिहाज से सैलानी को किसी प्रकार की दिक्कतें न आएं, इसके लिए भी पर्यटन सत्रों में बराबर इंतजाम किए जाते हैं।
बाघ देखने के लिए उत्सुक रहते हैं सैलानी
दुधवा नेशनल पार्क में ज्यादातर सैलानियों की निगाहें बाघ देखने के लिए लालायित रहती हैं। ऐसे में वह जंगल सफारी के दौरान बाघ का खुले में स्वच्छंद विचरण देखने के लिए काफी उत्सुक दिखाई देते हैं। पिछले पर्यटन सत्र में किशनपुर और दुधवा की सोनारीपुर रेंज में अच्छी तादाद में सैलानियों को बाघ के दीदार हुए थे। इस सत्र में सैलानियों ने चार शावकों संग एक बाघिन को भी देखा था। हाथी की सवारी कर गैंडों को भी करीब से देखने का मौका सैलानी छोड़ना नहीं चाहते हैं।
दुधवा का पर्यटन सत्र देता है रोजगार के अवसर
दुधवा नेशनल पार्क का पर्यटन सत्र जिप्सी चालकों, गाइडों और स्टे संचालकों को रोजगार देने का काम करता है। इससे पर्यटन में इजाफा होने के साथ ही इनकी आमदनी भी होती है। अधिक संख्या में सैलानियों के आने से अच्छी आय भी अर्जित होती है।
साल दर साल सैलानियों की बढ़ती संख्या से दुधवा की लोकप्रियता के बारे में खुद ही जाना जा सकता है। पर्यटन सत्रों में सैलानियों को जहां दुधवा से संबंधित जानकारियां दी जाती हैं, वहीं वह यहां के बारे में अन्य लोगों को बताते हैं, तो सैलानी भी बढ़ते हैं। इससे पार्क के राजस्व में भी इजाफा होता है। पर्यटन के लिहाज से दुधवा नेशनल पार्क काफी उपयुक्त भी है।
-डाॅ. रंगाराजू टी, डिप्टी डायरेक्टर दुधवा नेशनल पार्क
दुधवा में सैलानियों की जिप्सी के आगे बैठे बाघ। फाइल फोटो
दुधवा में सैलानियों की जिप्सी के आगे बैठे बाघ। फाइल फोटो