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दुधवा: बाघ और तेंदुओं में बाहरी जानवरों से बढ़ रहा संक्रमण

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बाध
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लखीमपुर खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व में 40 दिन के अंदर चार बाघों की मौत के मामले में प्रदेश स्तर से गठित टीमों ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इन चार बाघों में से दो बाघों की मौत संक्रमण से होना बताया गया है। दुधवा के बाघों में संक्रमण की आशंका विशेषज्ञ पहले ही जता चुके हैं।
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दुधवा टाइगर रिजर्व के अधिकारी बताते हैं कि इंसानों और अन्य वन्यजीवों की तरह बाघ और तेंदुओं में भी संक्रमण होता है। संक्रमण बढ़ने की स्थिति में बाघ और तेंदुओं की गतिविधियां असामान्य हो जाती हैं। संक्रमण का शिकार होने पर बाघ कमजोर और सुस्त हो जाता है। संक्रमण बढ़ने पर वह खाना-पीना छोड़ देता है। संक्रमण से जिन बाघों की मौत हुई है, पोस्टमार्टम के दौरान उनके पेट खाली पाए गए। जिससे कहा गया कि उनकी मौत भूख-प्यास से हुई थी।
अप्रैल माह की 23 तारीख को मैलानी रेंज की सलेमपुर बीट में एक बाघ खेत में विचरण करता देखा गया। बाघ धीमी रफ्तार से चल रहा था। सूचना पर पहुंची वनकर्मियों की टीम जब तक बाघ को रेस्क्यू कर पाती तब तक उसकी खेत में ही गिर कर मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बाघ की मौत संक्रमण से होना बताई गई। इसी तरह जून 2023 में दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन के ग्रंट नंबर तीन बीट के रामपुर ढकैया गांव में रात के समय एक बाघिन गांव में घुस आई। कई घंटे गांव में विचरण करने के बाद अगले दिन सुबह उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम में इस बाघिन का पेट भी खाली पाया गया। पता चला कि इस बाघिन की मौत भी संक्रमण से हुई है।
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बाहरी जानवरों से भी बाघ, तेंदुओं में हो सकता है संक्रमण
दुधवा टाइगर रिजर्व के पशु चिकित्सक डॉ. दयाशंकर का कहना है बड़ी संख्या में बाघ और तेंदुए जंगल से बाहर निकलकर पालतू और छुट्टा पशुओं का शिकार कर रहे हैं। इससे बाघों और तेंदुओं में संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है। यहीं कारण है कि पिछले कुछ दिनों में बाघ और तेंदुओं की संक्रमण से मौत में इजाफा हुआ है। इस मुद्दे पर बाघ तेंदुओं की निगरानी और व्यापक अध्ययन जरूरी है।

निगरानी से बाघ और तेंदुओं का हो सकता है बचाव
वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. अजय कुमार आगा का कहना है कि बाघ और तेंदुओं में संक्रमण होने पर उनकी गतिविधियां असामान्य हो जाती हैं। ऐसे में नियमित निगरानी से संक्रमित बाघों को आसानी से खोजा जा सकता है। संक्रमित बाघों का समय पर इलाज करके उनकी जान बचाई जा सकती है। उनका कहना है कि बाघ और तेंदुओं को बाहरी जानवरों के संपर्क में आने से रोकने का प्रयास होना चाहिए।

बाघ और तेंदुओं में सामान्य रूप से संक्रमण हो सकता है। बाहरी जानवरों से भी बाघ और तेंदुओं में संक्रमण होने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। बचाव के लिए दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन जंगल से सटे गांवों में समय-समय पर पालतू पशुओं का टीकाकरण कराता है।
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- ललित कुमार वर्मा, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
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