लखीमपुर खीरी। धान खरीद की शुरुआत हो चुकी है। हालांकि सरकारी केंद्रों पर धान की आवक शुरू नहीं हो सकी है। मंडी में धान को सुखाने के लिए रखी 10 लाख की लागत वाली एक ड्रायर मशीन भी गायब हो गई है। मंडी सचिव को इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है।
जिले की कई तहसीलों में बाढ़ के कहर से किसानों की फसलाें को काफी नुकसान हुआ है। दरअसल जो धान इस समय मंडी पहुंच रहा है, उसमें बाढ़ की वजह से 18 से 20 प्रतिशत तक की नमी पाई जा रही है। धान की नमी को दूर करने के लिए मंडी समिति में ड्रायर मशीन लगवाई गई थी, जो काफी समय तक देखरेख के अभाव में धूल फांकती रही। मशीन इस बार मंडी से कहीं गायब हो गई।
मंडी के कर्मचारियों से लेकर अधिकारियों तक की बेपरवाही की हद तो यह है कि उन्हें यह तक नहीं पता कि आखिर इतनी बड़ी मशीन कहां चली गई। इस मशीन में किसान धान की फसल को सुखाकर केंद्रों पर बेच सकते थे, मशीन गायब होने से किसान नमी वाला धान मंडी में औने-पौने दामों में बेचने को मजबूर हैं।
ड्रायर मशीन सूखा देती थी धान की नमी
धान की ताजा फसल होने की वजह से उसमें नमी रहती है। धान नम होने की वजह से कुटाई के वक्त चावल टूट जाता था। इसको देखते हुए ड्रायर मशीन में इसे सुखाने का कार्य किया जाता है। मशीन गर्म हवा फेंककर धान को सुखा देती थी।
मशीन चलाने के लिए किसानों से मांगा जाता था डीजल
ड्रायर मशीन से फसल को सुखाने के लिए किसानों से ही डीजल मांगा जाता था। लिहाजा किसानों को जेब ढीली करनी पड़ती थी। किसान डीजल की ज्यादा खपत को देखकर इस मशीन का उपयोग करने से बचते थे।
मंडी समिति में ड्रायर मशीन भी है। मुझे इस बात की कोई जानकारी नहीं है। मशीन कहां है, इस बात की जानकारी कर्मचारियों से ली जाएगी। अगर मशीन खराब होगी तो उसे बनवाया जाएगा।
- आशीष सिंह, मंडी सचिव