लखीमपुर खीरी। अतिरिक्त दहेज के लिए नवविवाहिता को प्रताड़ित करने और उसे मौत के घाट उतारने के मामले में एडीजे चिंताराम ने 19 साल पुराने मामले में फैसला सुनाया है। अदालत ने बृहस्पतिवार को पति और सास-ससुर को दोषी पाते हुए दस-दस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उन पर 11-11 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए एडीजीसी संदीप मिश्र ने बताया कि मितौली थाना क्षेत्र के ग्राम भीखमपुर निवासी विमल दीक्षित के साथ वादी मुकदमा प्रेमप्रकाश ने अपनी पुत्री विभा की शादी 22 जून 2003 को की थी। आरोप है कि अतिरिक्त दहेज में 50 हजार रुपये की मांग के चलते विभा के साथ मारपीट की जाने लगी। 18 अप्रैल 2004 की सुबह दस बजे खबर मिली की विभा का शव घर के आंगन में पड़ा है।
जब वहां पहुंचे, तो उसकी गर्दन में चोटों के निशान मिले। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला घोटने से मौत होने की पुष्टि हुई थी। मामले में पति विमल दीक्षित, ससुर अरुण कुमार, सास उर्मिला और नंद बिट्टो के साथ ही देवर छोटे ने उनकी पुत्री की दहेज के लिए हत्या करने का मुकदमा दर्ज हुआ था।
अदालती सुनवाई के बीच ही 29 जून 2006 को ननद बिट्टो और देवर छोटे को नाबालिग पाते हुए उनकी फाइल किशोर न्याय बोर्ड भेज दी गई। बृहस्पतिवार को अदालत ने पति विमल दीक्षित, ससुर अरुण कुमार और सास उर्मिला देवी को दोषी पाते हुए दस-दस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही तीनों पर 11-11 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।