लखीमपुर खीरी। लखनऊ मंडल के अपर निदेशक स्वास्थ्य का शाम चार बजे तक पैथालोजी में सैंपल लेने और फिर उसी दिन रिपोर्ट देने का फरमान अस्पताल प्रशासन के लिए मुसीबत बन गया है। जिम्मेदारों का कहना है कि जब दोपहर 12 बजे तक सैंपल लिए जाते हैं तो जांच कर रिपोर्ट तैयार करने में चार बज जाते हैं। मगर, जब सैंपल चार बजे तक लिए जाएंगे तब रिपोर्ट देने में रात के नौ बजेंगे। सबसे बड़ा सवाल रात में रिपोर्ट लेने के बाद तीमारदार दिखाएंगे किसको।
जिला अस्पताल में रोजाना एक हजार से 1200 मरीजों का पंजीकरण होता है। इसमें से करीब 400 मरीजों को जांच के लिए लिखा जाता है। ऐसे में वार्डों में भर्ती और ओपीडी के मरीजों का सैंपल सिर्फ 12 बजे तक लेकर जांच प्रक्रिया शुरू होती है। पैथोलॉजी के लेाग बताते हैं कि अधिकतर मरीजों की आठ से दस जांचें होती हैं। बायोकेमेस्ट्री की जांच में करीब दो घंटे का समय लगता है। इस जांच के तीन सौ सैंपल होने पर छह बार जांच करनी पड़ती है, क्योंकि एक मशीन होने के कारण इसमें एक बार में 50 सैंपल ही लगते हैं। इन सबकी रिपोर्ट तैयार करने में ही आठ बज जाते हैं। ऐसे में चार बजे तक सैंपल लेकर रिपोर्ट तैयार करने में रात के दस बजेंगे। ऐसे में सुबह आठ बजे आकर रात दस बजे तक कर्मचारियों का रोकना भी एक बड़ी समस्या बनेगी।
स्टाफ व मशीनों की कमी बनेगी मुसीबत
पैथालॉजी में तीन एलटी, दो ऑपरेटर, एक एलए व एक वार्ड बॉय है। जबकि ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या को देखते स्टाफ बेहद कम है। इसके अलावा एक ही बायोकेमेस्ट्री मशीन है, जिसमें एक बार में 50 सैंपल ही लगते हैं। सूत्रों के अनुसार, स्टाफ से लेकर मशीनों की कमी के चलते शाम चार बजे तक सैंपल कलेक्ट कर जांच करना और फिर उसी दिन रिपोर्ट दे पाना संभव नहीं है।
सीएमएस अवकाश पर हैं। उनके आते ही रोस्टर अनुसार कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी, जिससे शाम चार बजे तक सैंपल कलेक्ट कर जांच प्रक्रिया शुरू हो सके और मरीजों को बेहतर जांच सुविधा मिल सके।
कफील अहमद, पैथोलॉजी प्रभारी