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जिला होम्योपैथिक अस्पताल : खुद का भवन और न पर्याप्त स्टाफ... मरीज परेशान

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जिला होम्योपै​थिक अस्पताल में ओपीडी करते हुए डॉ. हरीलाल- संवाद
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लखीमपुर खीरी। जिला मुख्यालय पर कहने को तो होम्योपैथिक अस्पताल है, लेकिन इसका न तो अपना भवन है और न ही पर्याप्त स्टाफ है। भवन के लिए कई वर्षों से जमीन तलाशी जा रही है, लेकिन मिल नहीं पा रही है। आधे-अधूरे संसाधनों के बीच किसी तरह काम चलाया जा रहा है। अस्पताल में चिकित्सक के रूप में सिर्फ डॉ. हरीलाल भार्गव की तैनाती है, लेकिन उनके पास दो और अस्पतालों का भी चार्ज है। लिहाजा वह हफ्ते में दो दिन ही यहां ओपीडी कर पाते हैं। बाकी दिनों में फार्मासिस्ट प्रतीक्षा वर्मा ही मरीजों को देखकर दवाएं देती हैं।
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जिला होम्योपैथिक अस्पताल पहले जिला अस्पताल परिसर में ही संचालित था। उस समय रोजाना 300 से 350 मरीज दवा लेने पहुंचते थे। अब वहां मेडिकल कॉलेज का निर्माण कराया जा रहा है, ऐसे में जिला अस्पताल को ओयल में शिफ्ट कर दिया और होम्योपैथिक अस्पताल पुराने अस्पताल परिसर के एक भवन में कर दिया गया, तब से यह अस्पताल यहीं चल रहा है। स्थान परिवर्तन के बाद से मरीजों की संख्या काफी कम हो गई। अस्पताल की स्थिति भी दयनीय हो गई है।
मेडिकल कॉलेज के निर्माण की वजह से अस्पताल आने-जाने का मुख्य रास्ता ही बंद कर दिया गया। ऐसे में अब अस्पताल जाने के लिए घूमकर दूसरे रास्ते से आना पड़ता है, लेकिन अब उस रास्ते पर भी निकलना खतरे से खाली नहीं है। मेडिकल कॉलेज निर्माण की वजह से उस रास्ते पर हमेशा खतरा बना रहता है। ऐसे में मरीजों की संख्या घटती जा रही है। मात्र 25-30 मरीज ही दवा लेने पहुंच पाते हैं।
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एक डॉक्टर पर दो अस्पतालों का चार्ज
जनपद में 29 होम्योपैथिक अस्पताल हैं। इतने ही डॉक्टर और फार्मासिस्ट होने चाहिए, लेकिन विभाग के पास मात्र 21 डॉक्टर और 16 फार्मासिस्ट हैं। इनसे जैसे-तैसे काम चलाया जा रहा है। एक डॉक्टर व फार्मासिस्ट के पास दो-दो अस्पतालों की जिम्मेदारी है। ऐसे में मरीजों को समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है।
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चुनाव में लगा दिए गए डॉक्टर, होगी दिक्कतें
विभाग के पास पहले से ही डॉक्टरों की कमी है, ऊपर से डॉक्टरों की ड्यूटी लोकसभा चुनाव में लगा दी गई है। एक महिला डॉक्टर को छोड़कर लगभग सभी डॉक्टरों को सेक्टर मजिस्ट्रेट बना दिया गया। ऐसे में दिक्कतें और बढ़ गई हैं।

भवन के लिए जमीन तलाशी जा रही है। जमीन मिलते ही अस्पताल का निर्माण शुरू करा दिया जाएगा। एक जमीन देखी गई है, लेकिन उसकी जांच के बाद ही उसे फाइनल किया जाएगा। डॉक्टर व फार्मासिस्ट कम हैं, जिसकी वजह से दिक्कतें आती है, फिर भी मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने का पूरा प्रयास रहता है। डॉक्टरों की चुनाव में ड्यूटी भी लग गई है। - डॉ. शैलेंद्र प्रताप सिंह, जिला होम्योपैथिक अस्पताल

जिला होम्योपैथिक अस्पताल में ओपीडी करते हुए डॉ. हरीलाल- संवाद

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