फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डेंगू के डंक से कराह रहा जिला... स्वास्थ्य विभाग आंकड़ेबाजी में फंसा

विज्ञापन
विज्ञापन
लखीमपुर खीरी। जिले में डेंगू संक्रमितों के मिलने का सिलसिला नहीं थम रहा है। दिन पर दिन बुखार पीड़ितों का आंकड़ा बढ़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों से कई गुना ज्यादा डेंगू संक्रमितों को जिला अस्पताल का डेंगू वार्ड, जिले व पड़ोसी जिलों में तमाम निजी अस्पतालों में चल रहा है लेकिन स्वास्थ्य विभाग इन्हें डेंगू मरीजों की श्रेणी में नहीं रखता। जबकि निजी पैथॉलोजी में डेंगू की रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है और कई लोग इससे जान भी गंवा चुके हैं।
विज्ञापन

शहर के मोहल्ला ईदगाह के बाद नौरगांबाद रोड स्थित सलेमपुर कोन में एक युवक में डेंगू की पुष्टि हुई है, जबकि कस्बे में अन्य कई लोगों को भी डेंगू बताया जा रहा है। जिले में तमाम लोग डेंगू की चपेट में हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में अब तक सिर्फ 30 लोगों को डेंगू का डंक लगा है। जबकि हकीकत में डेंगू संक्रमितों की संख्या इससे कई गुना ज्यादा है। जिला अस्पताल के डेंगू वार्ड में भले ही तीन संक्रमित भर्ती हों, लेकिन निजी अस्पतालों में इनकी संख्या सैकड़ों में हैं। जिनकी प्लेटलेट्स 10 हजार से भी नीचे पहुंच चुकी है। एक तरफ जहां निजी पैथालॉजी की रिपोर्ट पर निजी अस्पताल संचालक मरीजों का इलाज कर रहे हैं तो वहीं स्वास्थ्य अधिकारी प्लेटलेट्स कम होने को डेंगू तक नहीं मान रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग डेंगू की पुष्टि के लिए एलाइजा जांच जरूरी बताता है। बिना इस जांच के डेंगू बुखार का इलाज करना उचित नहीं है। सवाल है कि अगर निजी पैथॉलोजी सही जांच रिपोर्ट नहीं दे रहे हैं, तो ऐसी पैथोलॉजी लैब पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही और उनके लिये स्वास्थ्य विभाग ने क्या मानक तय किये।
विज्ञापन

जिले में अब तक 30 डेंगू के मिले मरीज
जिला मलेरिया अधिकारी शैलेंद्र श्रीवास्तव बताते हैं कि एलाइजा जांच सिर्फ जिला अस्पताल में होती है। कार्ड टेस्ट में जिन मरीजों को डेंगू होना बताया गया है उनकी एलाइजा जांच निगेटिव आई है। निजी पैथालॉजी वाले प्लेटलेट्स कम होने के आधार पर डेंगू संक्रमित होना बता देते हैैं, जबकि यह गलत है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें