लखीमपुर खीरी। प्रचंड गर्मी में बच्चों को उल्टी-दस्त की शिकायत बढ़ने लगी है। इसकी चपेट में आकर बच्चे सरकारी से लेकर निजी अस्पताल पहुंच रहे हैं। 19 से 22 जून तक 11 बच्चे डायरिया की चपेट में आकर गंभीर हालत में जिला अस्पताल पहुंचे। इनको चिल्ड्रन वार्ड में भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया गया, लेकिन इसके बावजूद दो बच्चों की मौत हो गई। उधर, अलर्ट मोड पर आए स्वास्थ्य विभाग ने सीएचसी पर ओआरएस पैकेट व जिंक टेबलेट की खेप भिजवाई है।
संक्रामक रोग प्रभारी एसीएमओ डॉ. अश्वनी कुुमार ने बताया कि आने वाले बरसात के मौसम को देखते हुए ओआरएस और जिंक की जिले में पर्याप्त उपलब्धता है। हर सीएचसी, पीएचसी पर मांग के अनुसार, ओआरएस एवं डेस्टोज मोनोहाड्रेट पाउडर यानि ग्लूकॉन डी एवं जिंक टेबलेट उपलब्ध करा दी गई हैं। बताया कि शून्य से पांच साल तक के 10 फीसदी बच्चों की मौत का कारण दस्त और उल्टी है।
मृत्यु का मुख्य कारण निर्जलीकरण के साथ इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी होना है। जबकि ओआरएस एवं जिंक का प्रयोग कर डायरिया से होने वाली मौत का टाला जा सकता है। उन्होंने बताया कि बारिश का मौसम आने वाला है। गर्मी और बारिश में बच्चों की सेहत पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। जरा सी लापरवाही डायरिया सहित अन्य बीमारियों का कारण बनकर बच्चों के लिए जानलेवा बन सकती है।
ओआरएस- 1,50,000
जिंक टेबलेट- 2,50,000
डेस्टोज मोनेेहाइड्रेट पाउडर- 2,50,000
मेट्रोजिल टेबलेट- 600000
(स्टोर में मौजूद दवाओं की अनुमानित संख्या)
जिला अस्पताल भर्ती होने वाले डायरिया पीड़ित बच्चे
नीमगांव निवासी पंकज की छह वर्षीय पुत्री मोहिनी, दो वर्षीय मेनका पुत्री धनीराम निवासी मितौली, पांच वर्षीय गौरव पुत्र संदीप निवासी नीमगांव, डेढ़ वर्षीय शिवांशी पुत्री पंकज निवासी सलेमपुर, साढ़े तीन वर्षीय मोना पुत्री रामजी निवासी सीएमओ कार्यालय कैंपस एवं फूलबेहड़ निवासी अवधेश कुुमार की पुत्री बेबी अंशू सहित दो वर्षीय मेनका पुत्री धनीराम, लाल्हनपुर निवासी पंकज की छह वर्षीय पुत्री मोहिनी, शहर की पंजाबी कॉलोनी निवासी कपिल के सात वर्षीय पुत्र विनायक, हाथीपुर निवासी अंकित कुमार की 18 माह की पुत्री मिस्ट्री भर्ती हुई। इस दौरान मेनका एवं ढाई माह की बेबी अंशू की इलाज के दौरान मौत हो गई।