देवकली में लगा सपेरों का मेला, कालसर्प योग दोष के निदान के लिए हुए अनुष्ठान
मंदिरों में उमड़ी श्रद्घालुओं की भीड़, श्रद्घालुओं ने पवित्र नदियों तीर्थों में किया स्नान
लखीमपुर खीरी। नागपंचमी का पर्व जिले भर में श्रद्घा और भक्ति के साथ मनाया गया। लोगों ने मंदिरों में जाकर भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना की। मंदिरों में महिलाओं ने दीवारों पर नाग की आकृति बनाकर पूजा अर्चना की तो मंदिरों में श्रद्घालुओं ने नाग पूजा कर प्रतीकात्मक रूप से दूध पिलाया। मंदिरों के सामने सपेरों की भीड़ रही। शाम को लड़कियों ने कपड़ों की गुड़िया बनाकर मंदिर के सामने और चौराहों पर डालीं।
नागपंचमी के अवसर पर देवकली स्थित भगवान देवेश्वरनाथ महादेव का रुद्राभिषेक और जलाभिषेक कर काल सर्प दोष निवारण का अनुष्ठान किया। आचार्य अमित मिश्रा ने बताया कि काल सर्प दोष निवारण के लिए 108 रजिस्ट्रेशन हुए थे, जबकि 20-22 अतिरिक्त लोगों ने भी दोष निवारण के लिए अनुष्ठान और पूजा अर्चना संपन्न की। कहा कि नाग पंचमी के दिन देवेश्वरनाथ महादेव पर सिर्फ जल चढ़ाने से भी सर्प दोष का निवारण होता है। उधर, श्रीमती चंद्रकला संस्कृत विद्यापीठ में काल सर्प योग निवारण कार्यक्रम हुआ। इसमें आचार्य प्रमोद दीक्षित ने मेरठ, दिल्ली, हापुड़, शाहजहांपुर, सीतापुर, हरदोई, उन्नाव, बाराबंकी, गोला, सिंगाही, पलिया, खमरिया आदि जगहों से आए करीब 200 लोगों का कालसर्प दोष निवारण कार्यक्रम आचार्य सुधीर मिश्र, वेदपाठी हरिराम मिश्र, कथावाचक अखिलेश शास्त्री, व्याकरणाचार्य अवधेश अवस्थी, पंडित सुनीत मिश्रा, आचार्य रवि दीक्षित, मोहित शास्त्री, राघवराम शास्त्री, पंडित राहुल दीक्षित, आचार्य रवि मिश्रा सहित गुरुकुल के वटुक ब्रह्मचारियों शिवा मिश्रा, गौरव तिवारी, अमन शुक्ला, आकाश मिश्र, दिलीप दीक्षित, अंकित मिश्र, ऋषभ शुक्ला, सौरभ अवस्थी ने कराया।
मोहम्मदी रोड पर लगा लोक परंपरा का गुड़ियों का मेला
गोला गोकर्णनाथ। मंगलवार को पौराणिक शिव मंदिर में श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल शिव का गंगाजल और दूध से अभिषेक कर अभय दान का वरदान मांगा। वहीं श्रद्धालुओं ने नागदेव को दुग्ध पान कराया। साथ ही मोहम्मदी रोड पर लोक परंपरा का गुड़ियों का मेला लगा। सावन में जहां छोटी काशी में शिवभक्त, कांवड़ियों, श्रद्धालुओं की लाखों की भीड़ उमड़ रही है। वहीं लोक परंपरा और मान्यताओं का त्योहार रंग पंचमी भी परंपरागत ढंग से मनाया गया।
नाग पंचमी को लोक मान्यताओं परंपरा के तहत गुड़ियों का त्योहार भी कहा जाता है। लोक परंपरा के तहत मोहम्मदी रोड पर गांधी विद्यालय के सामने प्राचीन गुड़ियों का मेला लगा। जहां बालिकाओं और युवतियों ने कपड़े की कतरन से बनीं गुड़िया डालीं। युवकों ने मूंज के कूड़े बनाकर गुड़ियों को पीटा। संवाद
देवकली में लगा सपेरों का मेला, उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
फरधान। नागपंचमी के मौके पर श्रद्धालुओं ने देवकली में भगवान शंकर के साथ नागदेवता की भी पूजा की। जिले के चर्चित देवकली के बाबा देवेश्वर नाथ मंदिर में नागपंचमी के दिन में भारी भीड़ रही। मंदिरों के अलावा घरों में दूध से भरा कटोरा रखकर नाग देवता का आह्वान किया। लोगों ने नागदेवता के दर्शन कर गंगाजल, दूध, पुष्प, अक्षत आदि अर्पित कर पूजा की। नाग उपासना के लिए प्रसिद्ध देवकली तीर्थ पर सपेरों का मेला लगा। आसपास के कई जिले के लोगों ने देवकली पहुंचकर नागों के दर्शन किए।
बिजुआ। भीरा में पुराने शिव मंदिर पर बिजुआ में टेढेश्वर नाथ मंदिर पर पड़रिया तुला में श्रीठाकुर जी पावन धाम पर मालपुर में शिव मंदिर पर नौसर जोगी में शंकर जी के मंदिर पर गुलरिया में भोले बाबा के मंदिर पर सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ रही। नागपंचमी होने के नाते नाग देवता की विशेष पूजा की गई तथा उनके लिए जगह-जगह पीने के लिए दूध रखा गया।
मोहम्मदी। नागपंचमी का त्योहार हर्षोल्लास से मनाया गया। मंदिरों में श्रद्धालुओं ने दूध चने का प्रसाद चढ़ाया। लोगों ने सर्पों को दूध पिलाया। पालन नाथ मंदिर जंगली नाथ मंदिर गोकन के शिव मंदिर पर शंकर जी और नाग देवता की पूजा अर्चना कर प्रसाद चढ़ाया गया। संवाद