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महेवा रियासत के वंशज बोले- लिलौटीनाथ मंदिर पूर्वजों की देन

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महेवा गढ़ी में राजपरिवार के राघवेंद्र बहादुर सिंह और गजेंद्र बहादुर सिंह।
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विधायक योगेश वर्मा चाहते हैं कि मंदिर का प्रबंधन प्रशासन को सौंपा जाए
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वंशज बोले, पूर्वजों ने महंतों को सौंपा था मंदिर, पर व्यवस्था में पारदर्शिता जरूरी
लखीमपुर खीरी। 19वीं शताब्दी के पूर्वाद्घ में बना यह मंदिर इन दिनों सदर विधायक और मंदिर के महंत के बीच हुए विवाद को लेकर सुर्खियों में है। विधायक योगेश वर्मा के एक बयान ने महेवा घराने के वंशजों को भी मामले में मंथन करने पर मजबूर कर दिया है। वंशज अब मंदिर से जुड़े दस्तावेज खंगाल रहे हैं। उधर, खबर यह भी है कि सदर विधायक योगेश वर्मा ने वंशजों से मामले में सामने आने की अपील की है।
बृहस्पतिवार को लिलौटीनाथ मंदिर परिसर में हंगामे और महंतों से विवाद के बाद सदर विधायक योगेश वर्मा ने नाराजगी जताते हुए कहा कि मंदिर परिसर में स्टैंड और दुकानों के माध्यम से अवैध वसूली को लेकर वह सरकार के प्रतिनिधि होने के नाते सरकार से मांग करेंगे कि इस मंदिर का ट्रस्ट बने। मंदिर का ट्रस्टी और प्रबंधक प्र्रशासन हो, ताकि मंदिर की व्यवस्था सुचारु रूप से चल सके।
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सदर विधायक के इस बयान ने महेवा घराने से जुड़े उनके वंशजों में हलचल पैदा कर दी। उन्होंने पूरी घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए मामले में पारदर्शी व्यवस्था होने की वकालत की। महेवा घराने के वंशज राघवेंद्र बहादुर सिंह और गजेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि लिलौटीनाथ मंदिर उनके पूर्वजों की देन है, जिसको वह सरकारी हाथों में कभी नहीं जाने देंगे। लिहाजा, इस मामले में वह अपने परिवार के लोगों के बीच बैठकर मंथन कर रहे हैं कि आगे क्या किया जाना चाहिये। इस संबंध में पुराने दस्तावेज भी तलाशे जा रहे हैं।
उधर, खबर यह भी है कि विधायक योगेश वर्मा ने महेवा घराने के वंशजों से मामले में सामने आने व हस्तक्षेप की अपील की है, जिस पर घराने से जुड़े वारिस मामले में मंथन कर आगे की रणनीति तय करने पर विचार कर रहे हैं। (संवाद)
अभी तक दोनों पक्षों की तरफ से किसी ने संपर्क नहीं किया है। विवाद और धक्कामुक्की हुई है। जानकारी है कि दोनों पक्ष बात कर रहे हैं। अगर मंदिर कमेटी की तरफ से लोग मिलना चाहते हैं, तो उनका स्वागत है। उनका विषय सामने आने पर ही पता चलेगा वह क्या चाहते हैं।
- संजीव सुमन, एसपी

महेवा स्टेट के राजघराने को जाता है लिलौटीनाथ मंदिर का श्रेय
लखीमपुर खीरी। मंदिर के निर्माण का श्रेय महेवा स्टेट के राजघराने को जाता है।
राजघराने के वंशज ने बताया कि 19वीं शताब्दी के पूर्वार्ध में उनके पूर्वजों ने रियासत के जंगल में अद्भुत शिवलिंग मिलने पर मंदिर का निर्माण करवाया था। उसकी देखरेख के लिए उस वक्त रियासत के पुजारी त्रिलोकनाथ गिरि को नियुक्त किया था, जिनके वंशज ही आज मंदिर में महंत हैं। साथ ही मंदिर की व्यवस्था चलाने के लिए पर्याप्त जमीन संबद्ध की थी, जिस पर बाद में कभी पूर्वजों ने दावा नहीं ठोंका, लेकिन यह अपेक्षा की कि मंदिर को चलाने की व्यवस्था पारदर्शी बने और प्राप्त निधि मंदिर के विकास में प्रयुक्त हो।
महेवा स्टेट के राघवेंद्र बहादुर और गजेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि महेवा स्टेट की स्थापना के बाद उनके पूर्वज अनूप सिंह ने 1830 में महेवा स्टेट की कमान संभाली। उसी दौरान जंगल भ्रमण के दौरान कंडवा नदी के किनारे दिव्य शिवलिंग के दर्शन हुए।
उन्होंने शिवलिंग को लाकर महेवागढ़ी गांव में स्थापित करने का मन बनाया, लेकिन वह शिवलिंग का स्थान बदलने में कामयाब नहीं हुए। उन्हें शिव ने स्वप्न में दर्शन देकर वहीं शिव मंदिर बनाने को निर्देशित किया, जहां यह दिव्य प्राचीन शिवलिंग मिला था। भगवान भोले नाथ की प्रेरणा से तत्कालीन राजा अनूप सिंह ने मंदिर का निर्माण शुरू कराया। बाद में इसे उनके उत्तराधिकारी दुनिया सिंह और गजराज सिंह ने इसे पूरा कराया। इस लिहाज से इस मंदिर का निर्माण काल वर्ष 1835 के आसपास का माना जा रहा है। महेवा स्टेट ने मंदिर से करीब 100 बीघा जमीन संबद्घ की थी ताकि उसकी आय से मंदिर का रखरखाव हो सके।

महेवा रियासत की धरोहरों की व्यवस्था के लिए आज होगी बैठक
लखीमपुर खीरी। लिलौटीनाथ मंदिर में सदर विधायक और महंतों के बीच हुए विवाद को महेवा घराने के वंशजों ने गंभीरता से लिया है। महेवा रियासत की धरोहरों के रखरखाव और बेहतर प्रबंधन के लिए महेवा रियासत के मालिकान आज सुबह 10 बजे मामले में बैठक करेंगे।
महेवा घराने के वंशज राघवेंद्र सिंह ने बताया कि शनिवार की सुबह 10 बजे महेवा रियासत के मालिकान गोकलेंद्र बहादुर सिंह के प्रतिनिधि, स्व. रविजा देवी के पुत्रगण, स्व. युद्धेंद्र बहादुर सिंह के पुत्रगण व स्व. उपेंद्र बहादुर सिंह के पुत्रगण लिलौटीनाथ मंदिर प्रकरण पर चर्चा के लिए बैठेंगे।
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शाम को सभी मालिकान सामूहिक तौर पर एक वरिष्ठ अधिवक्ता के साथ विधिक परामर्श करेंगे कि जनता की एतिहासिक धरोहरों के रूप में स्थापित रियासत महेवा के सभी मंदिरों के रखरखाव का व्यवस्थित स्वरूप क्या हो है? साथ ही यह भी कि उन मंदिरों पर निर्भर परिवारों के लिए किस तरह की व्यवस्था व्यवहारिक व विधिसम्मत होगी, जिससे रियासत की परंपरा के सामाजिक बोध के दायित्वों की भी पूर्ति हो। इस संबंध में सुबह 10 बजे बैठक होगी। संवाद
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