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Lakhimpur Kheri News: अन्य नाबालिग अभियुक्तों पर फैसला अभी बाकी

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लखीमपुर। दुष्कर्म और हत्या के इस मामले में दो अन्य नाबालिग अभियुक्तों पर कोर्ट ने अभी फैसला नहीं दिया है। एसपी गणेश प्रसाद साहा ने बताया कि एक अभियुक्त की 15 वर्ष की पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड भेजी गई है। इस पर अब फैसला सुनाया जाना शेष है। दूसरे अभियुक्त को अदालत ने नाबालिग घोषित कर दिया था। लेकिन, 17.5 वर्ष आयु होने के कारण अभियोग की पत्रावली अन्य अभियुक्तों से अलग अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-11 (पॉक्सो) में है, जिस पर महज फैसला सुनाया जाना है। संवाद
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कोर्ट के सजा सुनाने के बाद एसपी ने बुलाई प्रेस कॉन्फ्रेंस
सोमवार को एक तरफ पोक्सो अदालत निघासन कांड के दोषियों को सजा सुना रही थी तो दूसरी तरफ एसपी एसपी गणेश प्रसाद साहा मामले में पुलिस की पैरवी का ब्योरा पेश किया। उन्होंने बताया कि मामले में 14 दिन में आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया गया। कुल 43 गवाह बनाए गएए। निघासन पुलिस और अभियोजन की सक्रियता से एक साल के अंदर की कोर्ट ने सजा सुना दी। एसपी के साथ पहुंचे पीड़िता के परिजनों ने फैसले पर असंतुष्टि जाहिर की, जिससे आनन फानन प्रेस कॉन्फ्रेंस खत्म कर दी गई।


शुरू में सामने आई थी पुलिस की लापरवाही

पिछले साल 14 सितंबर की शाम को अनुसूचित जाति की दो सगी नाबालिग बहनों के शव पेड़ से लटके मिले थे। परिजनों ने आरोप लगाया था कि शव को पुलिस ने जबरन अपने कब्जे में लिया। इस पर ग्रामीणों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई थी। गांव वालों ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक चंद्रभान यादव शव को कपड़े में लपेटकर चले गए थे। गुस्साए ग्रामीणों ने पुलिस की गाड़ी घेरकर शव को ले जा रही एंबुलेंस को भी रोकने का प्रयास किया था। मौके पर देर शाम पहुंचे तत्कालीन एसपी संजीव सुमन व आईजी रेंज लक्ष्मी सिंह ने कहा था कि प्रथमदृष्टया दोनों बहनें फंदे से लटकी मिलीं हैं। पोस्टमार्टम के बाद स्थिति साफ होगी। अगली सुबह पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुष्कर्म और हत्या की पुष्टि होते ही पुलिस ने शाम तक सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने 14 दिन के अंदर चार्जशीट दाखिल की थी।
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सीएम योगी ने दिये थे 25 लाख मुआवजे और फास्ट ट्रैक अदालत में केस चलाने के निर्देश

मामले के तूल पकड़ने पर सीएम योगी ने पीड़ित परिवार को तत्काल 25 लाख की सहायता राशि के साथ ही एक आवास व कृषि भूमि का पट्टा देने के निर्देश दिए थे। साथ ही मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने के आदेश दिए थे। सपा, बसपा और कांग्रेसी प्रतिनिधिमंडल ने भी पीड़ित परिवार से मुलाकात की थी।
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