महेवागंज/सुंदरवल। फूलबेहड़ क्षेत्र में बाढ़ से घिरे गांवों में बाढ़ के पानी में मामूली कमी आई है, जबकि खेत-खलिहान और रास्ते अब भी डूबे हैं। उधर, बसहा पुल के दोनों किनारे क्षतिग्रस्त होने की वजह से मजबूरी में लोग नाव से आवागमन कर रहे हैं। जबकि, भोजन, पानी के लिए लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।
बसहा गांव को जाने वाले पुल के दोनों किनारे क्षतिग्रस्त होने से लोगो की कठिनाई और बढ़ गई है। कई दिन बीतने के बावजूद न तो संबंधित विभाग जागा और न ही अधिकारियों ने कोई सुध ली है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन ने खांभी सहित कुछ गांव में लंच पैकेट बांटे थे। लंच पैकेट के लिए नाव से तटबंध पर राहत केंद्र तक की दौड़ लगानी पड़ती है। नाव से आने जाने में ही पूरा दिन गुजर जाता है। कभी-कभी बिना लंच पैकेट के ही लौटना पड़ता है। बच्चे घर पर खाने की आस लगाए रहते है, मगर उनको खिलाने के लिए कुछ नहीं होता है।
शारदा नदी के पाना में बसहाभूड़, बड़ागांव, बहालीपुरवा, पांडेपुरवा, बड़ीखांभी, मेहंदी, खगईपुरवा, मंगलीपुरवा, चकलुआ, कुचलिहा, बेड़हा, सुतिया, गोपालपुरवा समेत दो दर्जन गांव टापू बने हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि आवागमन के लिए लगाई गई नाव में भी खेल किया जा रहा है। प्रशासन ने बसहा में पांच नावें लगाई हैं। आरोप है कि प्रधान और पंचायत सेक्रेटरी अपने करीबियों को नाव उपलब्ध करवा रहे हैं।
धीमी हुई कटान की गति, दहशत बरकरार
बिजुआ। ब्लॉक के गांव चकपुरवा में रविवार को कटान की गति धीमी रही। पिछले 24 घंटे में कोई मकान नहीं कटा है, लेकिन नदी में आधे लटके घर किसी भी समय गिर सकते हैं। चकपुरवा जाने वाले रास्ते अब भी बंद हैं। किसी भी तरफ निकालने का कोई मार्ग नहीं बचा है। लोग जहां के तहां फंसे हुए हैं। कोई भी अफसर ग्रामीणों की सुध लेने गांव नहीं पहुंचा है। इससे ग्रामीणों में रोष है। उधर, बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए पड़रिया तुला के मेडिकल स्टोर एवं डॉक्टरों ने मेडिकल कैंप लगाकर अपने स्तर से दवाइयां वितरित कीं। संवाद
चक पुरवा में कटान की जद में मकान
चक पुरवा में कटान की जद में मकान