रामलीला मेले में सजी कवियों और शायरों की महफिल
निघासन। रामलीला मेले में शुक्रवार की रात कवियों और शायरों की महफिल सजी। वाणी वंदना के बाद सीतापुर के कवि जगजीवन मिश्र ने ‘बेटियां जल रहीं उनको दिखता नहीं, हम पराली जलाएं तो गुनहगार हैं’ पढ़कर खूब तालियां बटोरीं।
कानपुर से आईं शायरा हिना आरजू ने ‘जवानी है तो आएंगे हजारों प्यार के तोहफे, किसी अंजान का तोहफा कभी स्वीकार मत करना’ पढ़ा। अजय आकाश ने ‘शृंगार रस की रचना नैनों से दूर करके उसे ले गया, खुद को मगरूर करके उसे ले गया। इसकी खातिर प्रतीक्षित रहे उम्र भर, कोई सिंदूर भरके उसे ले गया’ पढ़ा।
नवोदित कवि प्रशांत पांडे ने किसानों का महत्व बताते हुए पढ़ा- तुम्हारी पार्टियां चाहे तो कितनी भी बड़ी हों पर, किसानों से ही अन्न का सपना साकार होता है। कवयित्री रंजना सिंह हया ने सुनाया- गुजरता वक्त भरोसा हमारा तोड़ गया, हमें लगा था कि आसान भूल जाना है। इनके अलावा प्रियांशु वात्सल्य, प्रमोद पंकज, संदीप मोहन, अर्जुन सिंह चांद और आलोक गंजरहा ने भी अपनी रचनाएं पेश कीं।