लखीमपुर खीरी। शहर, कस्बों की सड़कों और खेतों में घूमते छुट्टा पशु हादसे और विवाद की वजह बन रहे हैं। छुट्टा पशुओं के भगाने के विवाद में भीरा थाना क्षेत्र के रड़ा बाजार में दो ग्रामीणों की हत्या कर दी गई थी। फसलों की सुरक्षा में किसान पहरेदार बन गए हैं। संरक्षण और भरण-पोषण पर लाखों खर्च के बाद भी छुट्टा पशु शहर की गलियों और गांव में घूमते दिखते हैं। प्रशासन और पशुपालन विभाग कागजी आंकड़े दुरुस्त करने में जुटा है।
जिले में छुट्टा पशुओं के संरक्षण और भरण-पोषण के लिए 131 गो-आश्रय स्थल संचालित हैं। वृहद गोशालाएं भी हैं। पशुपालन विभाग इन आश्रय स्थलों में करीब 29 हजार पशुओं के संरक्षण का दावा भी करता है। तमाम प्रयासों और लाखों खर्च के बाद भी छुट्टा जानवर शहर और कस्बों की सड़कों पर डेरा जमाए दिखते हैं। लखीमपुर-सीतापुर मार्ग, मितौली मार्ग, गोला गोकर्णनाथ, पलिया, धौरहरा और अन्य स्थानों पर भी छुट्टा जानवर आमजन की मुसीबत बने हैं। किसानों की फसलों को नुकसान तो पहुंचा ही रहे। बड़ी घटनाओं का कारण भी बन रहे हैं।
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केस-एक : दो अगस्त को भीरा थाने के रड़ा बाजार में छुट्टा पशुओं को भगाने के विवाद ने खूनी संघर्ष का रूप ले लिया था। गांव निवासी रामजीत सिंह और रामखेलावन उर्फ गुड्डू की पीटकर हत्या कर दी गई। 11 अन्य लोग चोटिल हुए थे। गांव में तनाव को देख कई थानों की पुलिस तैनात की गई। एक बटालियन पीएसी भी लगाई गई। आईजी रेंज प्रशांत कुमार भी गांव पहुंचे थे।
केस- दो : 14 जून की रात मैलानी थाना क्षेत्र में बांकेगंज-कुकरा मार्ग पर अचानक से सामने आए छुट्टा पशु को बचाने के चक्कर में बांकेगंज ब्लॉक की ग्राम पंचायत पहाड़ापुर के प्रधान गुरुलाल सिंह की कार हाईटेंशन लाइन के खंभे से टकरा गई थी। हादसे में प्रधान गुरलाल की मौत हो गई। दो अन्य लोग घायल हुए थे। कई अन्य हादसे भी छुट्टा पशुओं की वजह से हुए हैं।
आंकड़ों में गो-आश्रय स्थल और संरक्षित पशु
131 कुल गो-आश्रय स्थल संचालित हैं जिले में
43,315 कुल पंजीकृत गोवंश हैं
10,500 गोवंशोंं की सुपुर्दगी की गई है
29 हजार के करीब पशु संरक्षित किए गए हैं