जंगबहादुरगंज। वृंदावन धाम के महंत भरत शरण जी महाराज ने कहा कि भगवान के संतों, भक्तों, नाम और धाम में भेद नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान अपने भक्तों की उसी प्रकार सेवा करता है, जैसे मां अपने पुत्र की और गाय अपने बछड़े की। महंत भरत शरण महाराज ने भक्तमाल कथा सुनाते हुए कहा कि राम नाम की महिमा न्यारी है। राम के नाम से तो पत्थर भी तर जाते हैं। वेद पुराण पुरातन और सनातन है। भगवान हमेशा भक्त के मान और सम्मान की रक्षा करते हैं। भक्तमाल कथा के प्रमुख श्रोता स्वयं श्री ठाकुर जी महाराज हैं। उन्हें अपने भक्तों की कथा में अपार रसानंद की प्राप्ति होती है। भक्तमाल भक्तों की माला है। जिसे नाभा गोस्वामी ने लिखा है। जयपुर के गोविंदमाधव मंदिर का जिक्र करते हुए कहा कि जहां स्वयं भगवान ने प्रकट होकर कहा कि भक्तमाल मुझे सुनाओ।