ग्रामीणों को बचाव की जानकारी देकर किया प्राइमरी रिस्पांस टीम का गठन
मैलानी इलाके के छेदीपुर गांव में बाघ और मानव संघर्ष पर रोक के लिए अब डब्ल्यूटीआई सामने आई है और उसने ग्रामीणों को बचाव के कई उपाय बताते हुए प्राइमरी रिस्पांस टीम का गठन किया है। टीम गठित करने के बाद संस्था ने बुनियादी जरूरतों का ध्यान रखते हुए टीम के सदस्यों को उपकरण भी दिए हैं। संस्था की माने तो जागरूकता और टीम के गठन के बाद इस संघर्ष को कम किया जा सकता है।
मैलानी इलाके के छेदीपुर समेत गांवों के पास एक बाघिन ने दो व्यक्तियों को मार डाला था। इससे वन्यजीव मानव संघर्ष को बल मिलने लगा था और ग्रामीणों में वन्यजीवों के प्रति गुस्सा पनप रहा था। इसको देखते हुए डब्ल्यूटीआई ने सार्थक पहल की है। संस्था ने गांव पहुंचकर ग्रामीणों के दर्द को सुना और उनको बताया कि जंगल के समीपवर्ती गांवों में इस तरह की घटनाओं को टाला जा सकता है। समाजशास्त्री प्रेमचंद्र पांडेय ने बताया कि उनकी प्रोजेक्ट टीम गुरुवार को आ गई है कल से उनकी टीम भी बाघ के ट्रेंक्यूलाइजेशन का प्रयास करेगी। बताया कि हमारी प्राथमिकता है कि अब और मानव हानि नहीं हो। इसके बाद उस बाघ की पहचान करनी है जो ग्रामीणोें को मार रहा है। उसके बाद उसे ट्रेंक्यूलाइज करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि उनकी टीम में दिल्ली के वरिष्ठ जीव विज्ञानी डॉ. मयूख चटर्जी, वन्यजीव चिकित्सक डॉ. ऐरन वेसली आदि भी हैं। उन्होंने ग्रामीणों को प्रशिक्षण भी दिया और वहीं प्राइमरी रिस्पांस टीम का गठन भी किया। इसके बाद उन्होंने इस टीम के सदस्यों को टार्च, पटाखे आदि तमाम उपकरण भी दिए, जिससे वे जंगली जीवों को खदेड़ सकें। वन्यजीव प्रेमियों के मुताबिक यह एक अच्छा कदम है और इससे वन्यजीव मानव संघर्ष को रोकने में काफी हद तक सफलता मिलेगी।