कहा, भरण-पोषण लायक भी नहीं मिलता मानदेय
आंगनबाड़ी वर्कर्स और उनकी सहायिकाओं के मानदेय में बढ़ोतरी की उपेक्षा किए जाने के विरोध में सामाजिक संस्था समाधान हेल्पलाइन के प्रदेश प्रभारी अतुलेश कुमार की अध्यक्षता में बैठक हुई, जिसमें धौरहरा, रमियाबेहड़, निघासन, फूलबेहड़, लखीमपुर सदर सहित कई ब्लाकों से आईं आंगनबाड़ी वर्कर्स ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा। मांग की गई कि उन्हें इच्छा मृत्यु का अधिकार दिया जाए। प्रदेश प्रभारी ने प्रदेश सरकार के बजट में महिलाओं की उपेक्षा किए जाने की घोर निंदा की। कहा कि दिल्ली, उत्तराखंड, बिहार, तेलगांना, झारखंड समेत कई राज्यों ने आंगनबाड़ी वर्कर्स के मानदेय में बढ़ोतरी की है लेकिन यहां कोई सुनने वाला नहीं है। वर्कर्स ने लिखा है कि उन्हें और सहायिकाओं को श्रम विभाग की ओर से निर्धारित 348 रुपये देने का आदेश है लेकिन उप्र सरकार मात्र तीन हजार रुपये प्रतिमाह दे रही है। एक माह का मानदेय दो माह के बाद दिया जाता है। जो परिवार के भरण-पोषण के लिए पर्याप्त नहीं है। इच्छा मृत्यु मांगने वाली वर्कर्स में अर्चना बाजपेई, मालती वर्मा, सर्वेश कुमारी, जहिरून निशां, सुमन देवी, सुषमा राज, निर्मला वर्मा, संतोष कुमारी, पूनम देवी, शबनम, सरला गौतम शामिल हैं।