शौच के लिए गई युवती के साथ दुराचार के मामले में एडीजे एफटीसी जज नीलू मोघा ने दुराचारी को सात वर्ष की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने आरोपी पर दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए एडीजीसी निर्मल चौधरी ने बताया कि कोतवाली सदर के एक गांव की रहने वाली पीड़ित किशोरी चार फरवरी 2011 को शौच के लिए सुबह साढ़े पांच बजे गांव में ही गई थी। आरोप है कि उसी समय आरोपी ने उसके मुंह में कपड़ा ठूसकर बलात्कार किया। पीड़िता के शोरगुल पर गांव की दूसरी महिला पहुंची तब आरोपी धमकियां देते हुए भाग गया था। इस मामले में अदालत में पीडिता के अलावा, नूरजहां,जुलेखा, डा.मीरा वर्मा, एसएसआई नजमुल हसन नकवी, तथा एचसीपी रामवृक्ष पाल की गवाही दर्ज कराई गई। अदालत ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद आरोपी वजीर उर्फ इशरत अली को दुराचार के लिए दोषी पाते हुए सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही आरोपी पर दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।