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तमंचे से छात्र ने खुद को गोली से उड़ाया

Fri, 23 Oct 2015 10:39 PM IST
गोला गोकर्णनाथ
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हफीजपुर गांव में एक छात्र ने बृहस्पतिवार को अपने घर के कमरे में तमंचे से गोली मारकर आत्महत्या कर ली। घटना के समय घर में कोई नहीं था। देर रात पिता जब मेडिकल स्टोर बंद करके घर लौटे तो अपने इकलौते बेटे की खून से लथपथ लाश देखी। पुलिस का मानना है कि मानसिक तनाव के कारण छात्र ने खुदकुशी की।
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आत्महत्या करने वाला 15 वर्षीय ललित नगर के सेंट जांस स्कूल में 11वीं का छात्र था। उसके पिता कमलेश कुमार का मेला मैदान मिल डाइवर्जन मार्ग पर मेडिकल स्टोर है। परिवार वालों के अनुसार ललित की बड़ी बहन नेहा लखनऊ में पढ़ती है। मां बृहस्पतिवार सुबह अपनी बेटी के पास लखनऊ चली गई थीं। पिता सुबह दुकान पर चले गए थे। इसके बाद ललित घर पर अकेला था। दोपहर दो बजे फोन से बेटे ललित से बात हुई। उसके बाद ललित से किसी का कोई संपर्क नहीं हुआ था।
रात 10 बजे कमलेश कुमार जब दुकान बंद कर घर पहुंचेे तो मकान के दरवाजे खुले देखकर दंग रह गए। मकान के ऊपरी कमरे में जाकर देखा तो ललित मृत पड़ा था और पास में 315 बोर का तमंचा पड़ा था। ललित की दाहिनी कनपटी पर गोली लगी थी। सिर फटने से चीथड़े कमरे की छत और दीवारों से चिपक गए थे। कमरे की हालत देखकर वह चीख पड़े। उनकी सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव सील कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। तमंचा और कारतूस ललित कहां से लाया, परिवार वालों ने इससे अनभिज्ञता जताई। पुलिस ने संभावना जताई है कि उसने मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या की।
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मनोचिकित्सक डॉ दिनेश दुआ ने बताया कि जब समय पर सही गाइडेंस नहीं मिलता तो किशोरवय उम्र में अक्सर भावावेश में युवा ऐसे कदम उठा लेते हैं,। गोला निवासी ललित की आत्महत्या के पीछे एकाकीपन और भावावेश में आकर त्वरित निर्णय लेने का मामला प्रतीत हो रहा है। किशोर ऐसे मौके पर उपलब्धता के मुताबिक आत्महत्या के लिए साधन का चुनाव कर लेते हैं।
बुझ गया घर का चिराग
गोला गोकर्णनाथ। ललित अपने मां बाप का इकलौता बेटा होने के कारण लाडला था। बड़ी बहन नेहा लखनऊ में पढ़ाई कर रही है। मां भी बेटी के पास लखनऊ में थी। इधर घर पर बेटे की मौत की सूचना पाकर वापस आने के बाद मां और बहन बदहवास है। उनकी आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे। पिता कमलेश बेटे के शोक में रह रहकर फफक कर रो उठते हैं और बस उनके मुंह से यही बात निकलती है कि घर का चिराग बुझ गया और वह बर्बाद हो गए।
राख हो गए अरमा
गोला गोकर्णनाथ। ललित सेंट जांस में कक्षा 11 का छात्र था, मां बाप उसे उच्च शिक्षा दिलाकर प्रशासनिक अधिकारी बनाना चाहते थे। बीच में ही बेटे की मौत से उनके सारे अरमा राख हो गए हैं। जिसे उन्होंने उम्र ढलने के बाद अपना सहारा समझा था वह उन्हें बीच मझधार में ही छोड़कर चला गया।
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