कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में दुराचार से आहत 16 साल की किशोरी ने बुधवार शाम अपने ऊपर मिट्टी का तेल डालकर आत्मदाह कर लिया। किशोरी के पिता ने आरोपी के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज करने के लिए उसी रात तहरीर दे दी थी। मामला दो समुदायों के बीच का होने के कारण पुलिस इसे दबाए रही। तहरीर मिलने के तुरंत बाद आरोपी को पुलिस थाने ले आयी थी लेकिन उसकी गिरफ्तारी भी एक दिन बाद दिखाई गयी। शव का पंचनामा अगले दिन सुबह भर लिया गया था लेकिन पोस्टमार्टम शुक्रवार देर शाम हो पाया, दुराचार की पुष्टि के लिए स्लाइड बनाई गई है। 48 घंटे से अधिक समय तक शव को इस तरह रखे जाने के बारे में पुलिस का तर्क है कि जिले के डॉक्टर थारु क्षेत्र में लगे मेडिकल कैंप में गए थे इसलिए डॉक्टरों का पैनल नहीं बन पाया। सीएमओ से जब पूछा गया तो उनका कहना था कि पोस्टमार्टम के बारे में उन्हें शुक्रवार को दोपहर एक बजे पत्र दिया गया है। कहा तो यह भी जा रहा है कि पुलिस ने इस मामले को जीडी में एक दिन बाद बैक-डेट में दर्ज किया है।
बलात्कार के बाद आत्मदाह करने वाली किशोरी के पिता ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि 12 जनवरी की रात 10 बजे उनकी बेटी घर से कुछ दूर कुएं के पास पेशाब करने गई थी तभी गांव के ही युवक निर्देश वर्मा ने उसका मुंह दबाया और नशीला पदार्थ सुंघा कर बेहोश कर दिया। युवक उसे अपने अहाते के पास खेत मेें ले गया और वहीं उसे अपनी हवस का शिकार बनाया। उसने धमकी दी थी कि यह बात किसी को बताई तो उसके परिवार को जान से मार देगा। रात को तो लड़की घर आकर सो गई लेकिन 13 जनवरी की सुबह उसने सारी घटना अपनी मां को बता दी। पिता का कहना है कि अपनी इज्जत के डर से वह तत्काल दुराचार की रिपोर्ट लिखाने नहीं गए। वह किसी काम से अपनी बहन के यहां अलीगंज चले गए। 13 जनवरी की शाम चार बजे शर्मिंदगी के कारण बेटी ने कमरा बंद कर मिट्टी का तेल छिड़ककर आग लगा ली, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। सूचना पाकर रात करीब आठ बजे गांव लौटे तो पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव कब्जे में लेकर आरोपी निर्देश वर्मा को अपने कब्जे में ले लिया था। शुक्रवार को उसका चालान भेजा गया।
लड़की और आरोपी दो अलग-अलग समुदायों के है। गांव में तनाव के हालात देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया है। गांव वालों का कहना है कि पुलिस मामले को दबा रही है। डॉक्टर न होने का बहाना बनाया जा रहा है। किशोरी चूंकि बहुत गरीब परिवार की है इसलिए पुलिस मामले को गंभीरता से ले ही नहीं रही है।
सीओ-गोला एसी श्रीवास्तव ने बताया कि आरोपी के खिलाफ दुराचार करने, जान से मारने की धमकी देने सहित पाक्सो एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है। साथ ही आरोपी का चालान भेज दिया गया है। लड़की के शव का पोस्टमार्टम डॉक्टरों के पैनल से कराया गया है।
लखीमपुर खीरी।
तीसरे दिन शाम को हो पाया मजदूर की बेटी की लाश का पोस्टमार्टम
लखीमपुर खीरी। कोतवाली गोला के गांव में दुराचार पीड़ित मजदूर की बेटी के शव का पोस्टमार्टम 50 घंटे बाद हुआ तो एक बार फिर पुलिसिया रवैए पर उंगुली उठने लगी। हालांकि पुलिस और सेहत महकमे के जिम्मेदारों ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया ऐसे दे डाली, जैसे उन्होंने कोई कोताही नहीं बरती। डीएम किंजल सिंह भी बोलीं, कि उनके संज्ञान में मामला नहीं लाया गया वरना उसी रात में हर हाल में पैनल बनाकर पोस्टमार्टम कराया जाता।
कोतवाली गोला के एक गांव की 16 वर्षीय किशोरी के साथ जितना बुरा जीते जी हुआ, उससे ज्यादा उसकी मौत के बाद हुआ। 12 जनवरी की रात 10 बजे घर के पास से उठाने के बाद न सिर्फ उसके साथ दुराचार किया गया, बल्कि किसी से भी कहने पर परिवार समेत मार डालने की धमकी दी गई। शर्मशार किशोरी ने अगले दिन 13 जनवरी की शाम चार बजे कमरा बंद कर केरोसिन छिड़ककर आग लगा ली। उसने जिस समय आग लगाई उस वक्त घर में तीन छोटी बहनें और मां थीं। मां और बहनों की चीख पर आए गांव वालों ने खिड़की और दरवाजा तोड़कर अधजली अवस्था में उसे बाहर निकाला, लेकिन इस बीच उसने दम तोड़ दिया। 13 जनवरी की रात साढ़े आठ बजे मामले की रिपोर्ट दर्ज कर ली, लेकिन पंचनामा 14 जनवरी की सुबह भरा गया। पुलिस का कहना है कि पंचनामा रात को नहीं भरा जा सकता। 14 जनवरी को ही पोस्टमार्टम हाउस पर किशोरी की लाश भेज दी गई, लेकिन पोस्टमार्टम नहीं हो पाया। दो दिन तक शव का पोस्टमार्टम तक नहीं हुआ। किशोरी के पिता का कहना है कि पुलिस बृहस्पतिवार से ही कह रही थी कि अभी पोस्टमार्टम हो जाएगा। बृहस्पतिवार की शाम यह कह दिया गया कि अब कल पोस्टमार्टम होगा। रात में लाश को पोस्टमार्टम हाउस में ही बंद कर वह लोग गांव चले आए थे। शुक्रवार को फिर लखीमपुर आए और शाम को छह बजे पोस्टमार्टम हो पाया। पोस्टमार्टम में हुई लेटलतीफी की बाबत एसपी अखिलेश चौरसिया ने पहले डॉक्टरों को पैनल गठित न होने और वीडियोग्राफी की व्यवस्था न होने के कारण पोस्टमार्टम में देरी हुई। उधर सीएमओ डॉ अरुण कुमार का कहना था कि वह थारू गांव में गुरुवार और शुक्रवार व्यस्त रहे, इसलिए उन्हें कोई जानकारी नहीं है, जबकि डीएम किंजल सिंह का कहना है कि जानकारी होती तो वह उसी रात पैनल गठित करने सहित सभी व्यवस्थाएं करातीं।
डीएम के निर्देश पर बैक फुट पर आए सीएमओ
बोले, दोपहर एक बजे मिले कागज तो तत्काल गठित कराया गया पैनल
डीएम के निर्देश बाद थारू गांव में व्यस्तता बताने वाले सीएमओ डॉ अरुण कुमार ने 20 मिनट बाद ही अमर उजाला को फोन पर बताया कि सीएमएस डॉ वीके साहू को शुक्रवार एक बजे पैनल गठित कराने के संबंध में कागज मिले थे। उन्होंने तत्काल डॉ अमित सिंह, डॉ एसके मिश्रा और महिला अस्पताल की डॉ पुष्पलता को नामित करते हुए पैनल गठित कराकर पोस्टमार्टम करा दिया।
डीएम बोलीं, मामले की जांच कराएंगे
डीएम किंजल सिंह ने कहा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में देरी के पीछे किस स्तर पर लापरवाही हुई? इसकी जांच एसडीएम से कराएंगे और किसी भी स्तर पर लापरवाही मिली तो कार्रवाई की जाएगी।
मजदूरी कर परिवार को पालन करता है पिता
मृतका का पिता मजदूरी कर परिवार का पालन कराता है। छह बेटियों में दो की शादी हो चुकी है, जबकि मृतका से छोटी तीन बहनें और आठ वर्षीय भाई समेत छह लोगों का परिवार एक कमरे और छप्पर पड़े घर में किसी तरह से गुजारा करता है।
संपन्न है आरोपी का परिवार
दुराचार के आरोपी के पिता किसान हैं। उनका परिवार काफी संपन्न है। आरोपी स्नातक का छात्र भी है।
जलने से हुई मौत
एसपी अखिलेश चौरसिया ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में किशोरी की मौत का कारण जलने से होना बताया गया है। दुराचार की पुष्टि के लिए स्लाइड भेजी गई है, जिसकी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।