बैंक और साहूकार का लाखों बकाया, फीस न भरने पर बहन की पढ़ाई भी छूटी
डेढ़ साल पहले पिता की हो चुकी थी मौत
थाना मैगलगंज के ग्राम नयागांव में आर्थिक तंगी, कर्ज और बहन की फीस (ढाई लाख) जमा न हो पाने से छूट चुकी बीएएमएस की पढ़ाई से आहत युवक ने घर में विवाद होने के बाद कीटनाशक पीकर आत्महत्या कर ली। डेढ़ साल पहले पिता की मौत के बाद युवक ही घर को संभाल रहा था।
गांव नयागांव निवासी 19 वर्षीय प्रभुजोत सिंह के पिता मंजीत सिंह की डेढ़ साल पहले हार्ट अटैक से मौत हो गई थी, जिसके बाद परिवार में मां-बहन की जिम्मेदारी प्रभुजोत पर आ गई थी। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, जिससे प्रभुजोत परेशान रहने लगा। पिता की मौत के पहले से चला आ रहा साहूकारी का कर्ज लाखों में पहुंच गया। नतीजतन 2015 में बुलंदशहर के खुर्जा में बीएएमएस के तीसरे सेमेस्टर की पढ़ाई कर रही बहन रंजीत कौर की बकाया करीब ढाई लाख रुपये फीस जमा न कर पाने के कारण छूट गई थी। खेती योग्य करीब चार एकड़ जमीन पर बैंक से डेढ़ लाख रुपये कर्ज और कर्जा चुकता करने के लिए साहूकार लगातार प्रभुजोत पर दबाव बना रहे थे। मां बलविंदर कौर बताती है कि 26 मार्च को उसने बेटे से कुछ कर्जा चुकता करने की बात कही तो वह झगड़ने लगा। काफी विवाद भी किया। इसके बाद प्रभुजोत ने कीटनाशक पी लिया। तबीयत बिगड़ने पर परिवार वालों को जानकारी हुई, तो उसे सीतापुर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां पर तबियत में सुधार न हुआ, तो उसे लखनऊ ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया। कई दिनों जिंदगी-मौत के बीच संघर्ष के बाद शनिवार की शाम को प्रभुजोत ने दम तोड़ दिया। इससे मां बलविंदर कौर और बहन रंजीत कौर सदमे में हैं। वहीं इकलौते बेटे की मौत से परिवार टूट गया है।