2008 में वाईडी कालेज छात्रसंघ के महामंत्री की हत्या का मामला
आठ साल में पुुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई हत्यारोपियों को
माथे पर गोली मारने की पीएम रिपोर्ट फिर भी लगाई एफआर
चार गोली मारने के बाद भी बनाया गैर इरादतन हत्या का केस
तलबी आदेश के बाद किया सरेंडर, जमानत अर्जी हुई खारिज
अपराधियों से पुलिस की साठगांठ का इससे जीता जागता प्रमाण क्या होगा, वर्ष 2008 में हत्या जैसे संगीन मामले को पुलिस ने न सिर्फ गैर इरादतन हत्या में दर्ज कर दिया था, बल्कि मामले में एफआर लगाकर हत्यारोपी को क्लीन चिट दे दी थी। उसी मामले में अब एक हत्यारोपी को अदालती आदेश पर जेल जाना पड़ा। इससे बूढ़े पिता को इंसाफ की उम्मीद जागी है।
बताते चलें कि वाईडी कालेज छात्रसंघ के महामंत्री किशन अवस्थी की 13 जनवरी 2008 की शाम को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। किशन के पिता हरिनाम शंकर अवस्थी ने वाईडी कालेज के सामने दुकान चलाने वाले अमित सक्सेना और उसके भाई अजय सक्सेना के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप है कि इसके बाद सियासी दखल और साठगांठ का खेल शुरू हुआ।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार किशन को पेट में तीन और माथे पर एक गोली मारी गई थी फिर भी पुलिस ने न केवल आईपीसी की धारा 304 यानी गैर इरादतन हत्या में एफआईआर दर्ज की बल्कि मामला संदिग्ध बताते हुए मई 2009 में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। किशन के बूढ़े पिता ने इंसाफ के लिए पुलिस के उच्चाधिकारियों से लेकर राजनेताओं के दरबार तक में अर्जी लगाई लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। इस पर पिता ने फाइनल रिपोर्ट सीजेएम अदालत में प्रतिवाद दाखिल किया। अदालत ने करीब छह साल बाद 20 जनवरी 2014 को हत्यारोपी दोनो भाईयों को प्रथमदृष्ट्या संलिप्त पाते हुए तलबी के आदेश दिए थे। अदालती वारंट जारी होते रहे लेकिन पुलिस हत्यारोपियों को राहत देती रही। इसी दौरान हत्यारोपियों की ओर से सीजेएम अदालत के तलबी आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अर्जी भी दाखिल की गई थी और बहस के दौरान ही हत्यारोपियों की ओर से हाजिर होने और जमानत अर्जी जल्द सुनवाई कराने की राहत मांग ली। हाईकोर्ट ने छह सप्ताह की मोहलत दी थी। इसी बीच 24 जून को सीजेएम कोर्ट में अर्जी दाखिल करते हुए एक हत्यारोपी अजय सक्सेना ने सरेंडर कर दिया और जमानत अर्जी पेश की, जिसे कोर्ट ने खारिज करते हुए आरोपी को जेल भेज दिया।
अंतरिम जमानत की अर्जी भी खारिज
सीजेएम कोर्ट से जमानत खरिज होने के बाद हत्यारोपी अजय सक्सेना ने उसी दिन डीजे कोर्ट में अंतरिम जमानत अर्जी दाखिल की थी लेकिन अभियेाजन से डीजीसी शिवराज यादव और पूर्व एडीजीसी शैलेंद्र सिंह गौड ने अंतरिम जमानत के बिंदु पर हत्या जैसे संगीन मामले नहीं किए जाने की दलील दी थी। इसे स्वीकार करते हुए जिला जज राजवीर सिंह ने हत्यारोपी की अंतरिम जमानत अर्जी खारिज करते हुए फाइनल सुनवाई के लिए 27 जून मुकर्रर की थी। वाईडी कालेज के पूर्व महामंत्री किशन अवस्थी की हत्या के मामले में एडीजे नवनीत गिरि की अदालत में सोमवार को लंबी बहस चली। अभियोजन की ओर से शैलेंद्र सिंह गौड, एडीजीसी निर्मल चौधरी, वीरेश सिंह तोमर ने बहस की तो बचाव पक्ष की ओर से अध्यक्ष चंद्रमोहन सिंह ने बहस की, दोनो पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित कर लिया है।
मुझे इंसाफ मिलेगा...और हत्यारों को सजा
मृतक किशन के पिता हरिनाम शंकर अवस्थी कहते हैं कि पुलिस की कार्रवाई से वह टूट से गए थे लेकिन अदालत की कार्रवाई से आठ साल बाद इंसाफ की उम्मीद जगी है। किशन उनका इकलौता बेटा था। आज भी उसकी यादें परिवार ने संजो रखी हैं। इतना तय है कि देर भले हो पर हत्यारों को सजा जरूर मिलेगी।