जिला कारागार को बिजली सप्लाई से मुक्त करने और उसे सोलर सिस्टम से लैस करने की तैयारी चल रही है। जेल प्रशासन ने इसके लिए सर्वे कर दो हजार लोगों के खाना बनाने का प्रस्ताव तैयार कर डीआईजी कारागार को भेजा है। इनमें एक हजार की संख्या पर 30 लाख रुपये खर्च आने का अनुमान लगाया गया है। सोलर सिस्टम से लैस होने के बाद कारागार में बंदियों का भोजन भी सौर चूल्हे पर ही तैयार किया जाएगा।
जेल अधिकारियों के मुताबिक अब तक बंदियों का भोजन एलपीजी गैस पर बनाया जाता है और रोशनी के लिए बिजली का इस्तेमाल हो रहा है। लेकिन शासन के निर्देश पर कारागार में सोलर सिस्टम लगाने का प्रस्ताव मांगा गया है। कारागार में सोलर सिस्टम लगाने के लिए दक्षिण दिशा में छाया रहित 200 वर्ग मीटर की जगह चाहिए, जो यहां उपलब्ध है। सर्वे के बाद अधिकारियों ने डीआईजी कारागार को भेजे गए अपने सर्वे में कारागार में दो हजार लोगों का खाना बनने की बात कही है। यह प्रस्ताव भविष्य की स्थिति को ध्यान रखते हुए तैयार किया गया है। ताकि जेल में बंदियों की संख्या बढ़ने पर भी सोलर सिस्टम से भोजन बन सके और लगातार रोशनी मिलती रहे। प्रस्ताव में इस संख्या के हिसाब से करीब 60 लाख रुपये का खर्च आने की बात कही गई है।
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कारागार में खर्च हो रही बिजली
-पानी के लिए 45 हार्स पॉवर का कनेक्शन
-बंदियों के बैरकों और कार्यालय में 350 पंखे
-रोशनी के लिए 46 ट्यूबलाइट
-बैरकों सहित कार्यालयों में 345 सीएफएल
-बैरकों सहित कार्यालयों में 20 रंगीन टीवी
-पूरे कारागार में 23 कूलर
-कामकाज के लिए पांच कंप्यूटर और प्रिंटर
जिला कारागार में सोलर सिस्टम के लिए प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया गया था। जिसके बाद सर्वे कर डीआईजी कारागार को प्रस्ताव भेज दिया गया है। इसमें 60 लाख रुपये खर्च आने का अनुमान है। हालांकि यह प्रक्रिया अभी प्रस्ताव तक ही सीमित है, लेकिन उम्मीद है कि जल्द ही इस दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है।
-विनोद कुमार, जेल अधीक्षक