इसे पुलिस की लापरवाह कार्यशैली कहें या चोर-लुटेरों के प्रति पुलिस की उदारता। सदर कोतवाली क्षेत्र में बदमाश सालभर पुलिस को छकाते रहे लेकिन पुलिस उनकी धर-पकड़ के प्रति उदासीन रही। आंकड़ों पर गौर करें तो एक जनवरी से लेकर 15 दिसंबर तक हुई डकैती, लूट और चोरी की घटनाओं के खुलासे में कोतवाली पुलिस फिसड्डी साबित हुई।
पुलिस की वार्षिकी रिपोर्ट के मुताबिक सालभर में सदर कोतवाली क्षेत्र में एक बालक और एक वृद्धा समेत 13 लोगों की हत्या हुई। इनमें छाउछ में हुई महिला की हत्या को छोड़कर पुलिस ने सभी घटनाओं के खुलासे का दावा किया है। इसी तरह डकैती की तीन घटनाओं में एक का भी खुलासा नहीं हुआ। पुलिस ने लूट की नौ में छह घटनाओं के खुलासे का दावा किया लेकिन दाल व्यापारी रमेश गुप्ता से तीन लाख की लूट की घटना समेत तीन मामलों का अभी खुलासा नहीं हुआ है। नकबजनी की 12 घटनाओं में सात मामलों के आरोपी अभी भी फरार हैं। साधारण चोरी की 37 मामलों में सिर्फ आठ-दस घटनाएं ही खुल सकीं। कोतवाली क्षेत्र में सालभर में दुराचार के सात मामले सामने आएं, जिनकी रिपोर्ट दर्ज कर आरोपियों का चालान किया गया है। इसी क्रम में सालभर में दहेज हत्या के तीन मुकदमे दर्ज किए गए।
सालभर में 331 बाइक चोरी
ऑटोलिफ्टर गैंग सालभर पुलिस को चुनौती देता रहा लेकिन पुलिस कभी उनसे पार नहीं पा सकी। आंकड़ों के मुताबिक सालभर में 331 बाइक चोरी हुईं लेकिन बरामद सिर्फ 31 ही हो पाईं। इन आंकड़ों से सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि पुलिस बाइक चोरी की रिपोर्ट लिखने और उन्हें बरामद करने में हमेशा कन्नी काटती रही है।
दो कैदियों की फरारी ने भी परेशान किया
30 जुलाई वर्ष 2014 की सुबह करीब आठ बजे जिला कारागार के मुख्य गेट से तमंचा से लेकर फरार हुए दो कैदियों अजय उर्फ दद्दा तिवारी और रविंद्र लोध की गिरफ्तारी में पुलिस खासा परेशान हुई लेकिन तब भी दोनों कैदियों का कहीं सुराग नहीं लग सका। अब इनकी गिरफ्तारी के लिए एसटीएफ को भी लगाया गया है।