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...हे भगवान, जल्द पकड़ में आ जाए आदमखोर बाघिन

Thu, 25 Aug 2016 10:21 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मैलानी।
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गुस्सैल बाघिन
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शौच, खेतों की देखभाल, जानवरों के चारे की है समस्या
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छेदीपुर गांव के दो लोगों पर हमला कर उनकी जान लेने वाली आदमखोर बाघिन के गन्ने के खेतों को आशियाना बना लेने से ग्रामीण अब बहुत ज्यादा परेशान हो गए हैं। उनके सामने शौच के लिए जाने, खेतों की देखभाल और चारे की समस्या पैदा हो गई है। ग्रामीण ईश्वर से यही प्रार्थना कर रहे हैं कि जैसे भी हो बाघिन जल्द से जल्द वनकर्मियों की पकड़ में आ जाए, ताकि उनकी समस्या का निदान हो सके।
बाघिन ने सबसे पहले 19 अगस्त को खेत की रखवाली कर रहे टीकाराम और अगले ही दिन अपने खेत में निराई कर रहे बाबूराम की जान ले ली थी। दोनों ही घटनास्थल लगभग पांच सौ मीटर की दूरी पर हैं तथा दोनों ही लोगों पर हमला करने के बाद बाघिन उनके शवों को गन्ने के खेत में खींच ले गई थी। लगातार दो मौतों के बाद जागे वन महकमे ने 21 अगस्त को बाघिन को पकड़ने की कोशिश शुरू की। बाबूराम के हमले वाले गन्ने के खेत में तथा दो अन्य जगहों पर पिंजरे और सात ऑटोमोशन कैमरे लगाए, दुधवा पार्क से आए दो हाथियों पवनकली और पुष्पाकली से गन्ने के खेतों की कांबिंग शुरू की लेकिन वनकर्मी अब तक बाघिन की एक झलक तक न देख सके हैं। यही नहीं बाघिन अब तक किसी कैमरे में भी कैद नहीं हो सकी है। बाघिन के पकड़ में न आने से ग्रामीण दहशत की जिंदगी जीने को मजबूर हैं। 
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इस संबंध में जंडैल सिंह का कहना है कि इस समय धान तथा गन्ने के खेतों में पानी लगाने के साथ ही कीटनाशकों के छिड़काव की जरूरत है, लेकिन बाघिन के डर से वे लोगों खेतों में नहीं जा पा रहे हैं।
समाजसेवी चतुर्भुज चौहान का कहना है कि छेदीपुर वासी आदमखोर बाघिन से भयभीत हैं। उसके भय से वे अपने खेतों की देखभाल नहीं कर पा रहे हैं। फसलें चौपट होने के कगार पर हैं, यदि बाघिन जल्दी पकड़ में न आई तो फसलें बर्बाद होने पर गांव के काश्तकारों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो जाएगा।
गांव के ही राम औतार चौहान के मुताबिक फसलें बर्बाद होने के साथ ही जानवरों के चारे की समस्या भी बन गई है। जानवर भूख से परेशान हैं और अब वे खूंटे में बंधे-बंधे कमजोर होने लगे हैं। बाघिन जल्द पकड़ में न आई तो जानवरों को पालना भी मुसीबत हो जाएगा।
बलीराम का कहना है कि उनका धान का खेत, बाघिन के हमले में मारे गए बाबूराम के खेत के पास ही है। बुधवार को सुबह वह बाघिन के डर से दो-तीन लोगों के साथ अपने खेत में सिंचाई करने गए थे, तो सुबह करीब साढ़ छह बजे बाघिन गन्ने के खेत से निकलकर जंगल की तरफ जाते और दोपहर में डेढ़ बजे जंगल से वापस फिर गन्ने के खेत में आते दिखाई दी, तो वे लोग खेत से वापस आ गए। उनका कहना है कि इस कारण डर के मारे उनके पूरे खेत की सिंचाई भी नहीं हो सकी। 
गांव के श्रवण सिंह का कहना है कि खेतों की देखभाल के साथ ही ग्रामीणों के सामने शौच के लिए जाने की समस्या भी अहम है। अधिकतर ग्रामीण खेतों में शौच को जाते हैं। बाघिन के डर से दूर खेतों में न जाकर आसपास ही खेतों में शौच करने को विवश हैं। साथ ही सब्जी के खेतों की न तो देखभाल हो पा रही है और न ही  सब्जी को तोड़ पा रहे हैं, जिससे काश्तकारों के समक्ष आर्थिक संकट पैदा हो गया है।
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मास्टर इंद्रजीत सिंह ने कहा कि आदमखोर बाघिन के भय से उनकी फसलें चौपट हो रही हैं। फसलों में न तो पानी लग पा रहा है और न ही खाद, कीटनाशकों आदि का छिड़काव हो पा रहा है। बाघिन जल्द न पकड़ी गई तो फसलें पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगी। ऐसे में सरकार को काश्तकारों को मुआवजा देना चाहिए।
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