शहर के चित्रा हॉस्पिटल में शनिवार रात डॉक्टर व स्टाफ से मारपीट और लूट का मुकदमा लिखाए जाने के बाद नामजद भाजपा जिलाध्यक्ष विनोद मिश्रा समर्थकों के साथ रविवार दोपहर कोतवाली पहुंच गए। उन्होंने भी डॉ. सिंह और उनके स्टाफ पर हमला करने को अमादा होने और लूट की तहरीर दी, मगर रिपोर्ट न लिखे जाने पर गुस्साए भाजपाइयों ने कुर्सियां फेंकते हुए कोतवाली के गेट पर धरना दिया। तीन घंटे तक पुलिस विरोधी नारेबाजी करने के बाद जिलाध्यक्ष ने 48 घंटे में कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी देकर धरना स्थगित किया।
जिलाध्यक्ष मिश्रा अपने बेटे सुमित मिश्रा को इलाज के लिए शनिवार रात चित्रा हॉस्पिटल लेकर गए थे। वहीं से बवाल की शुरुआत हुई। डॉ. मानवेंद्र सिंह ने रिपोर्ट लिखाते हुए कहा है रात करीब 10.30 बजे विनोद मिश्रा द्वारा लाए गए मरीज का वह चेकअप कर रहे थे। अचानक विनोद मिश्रा और उनके साथ आए सात-आठ व्यक्तियों ने गालियां देते हुए उन्हें पीटना शुरू कर दिया। साथ ही उन्हें खींचकर बाहर ले आए। भाजपा जिलाध्यक्ष ने उन्हें (डॉ. सिंह) को गाड़ी में डालने को कहा। शोर सुनकर मरीज और तीमारदार आ गए, जिससे किसी तरह उनकी जान बच पाई। इसी बीच विनोद मिश्रा ने अपना पिस्टल निकाल लिया तथा उनके साथ के व्यक्ति ने डॉक्टर की जेब से दो हजार रुपये छीन लिये। साथ ही धमकी दी कि यदि कोई कार्रवाई की तो अस्पताल से उठाकर ले जाएंगे और जान से मार डालेंगे। पुलिस ने रिपोर्ट मारपीट करने और लूटपाट की धाराओं में दर्ज की। इसमें सात-आठ अज्ञात दर्शाए गए हैं, जबकि जिलाध्यक्ष नामजद हुए हैं।
उधर, कोतवाली में तहरीर देते हुए जिलाध्यक्ष मिश्रा ने कहा कि वह अपने बेटे सुमित मिश्रा को तबियत खराब होने के कारण चित्रा हॉस्पिटल ले गए थे। वहां डॉ मानवेंद्र ने नशे की हालत में लड़के को गलत इंजेक्शन लगा दिया, जिससे उसकी हालत बिगड़ने लगी। बेटे की बिगड़ती हालत देख अस्पताल स्वामी डॉ. एसपी वर्मा को बुलाने के लिए कहा तथा बेटे को अन्यत्र ले जाने के लिए गाड़ी बुलाई। इस पर डॉ. मानवेंद्र और स्टाफ लड़के को अस्पताल से अन्यत्र न ले जाने का दबाव बनाने लगे और अमादा फौजदारी हो गए। डॉ. मानवेंद्र सिंह ने लड़के के गले से सोने की चेन छीन ली और एक कर्मचारी ने पर्स जबरन छीन लिया। बाद में बेटे को वह उसे जिला अस्पताल ले गए। जिलाध्यक्ष की इस तहरीर पर शहर कोतवाल दुर्गेश चंद्र श्रीवास्तव ने जांच करने की बात कही, जिस पर भाजपा जिलाध्यक्ष समेत कार्यकर्ता भड़क गए। यहां जिलाध्यक्ष और कोतवाल में नोकझोंक के बाद भाजपाई कुर्सियां फेंकते हुए कोतवाली गेट पर आकर धरने पर बैठ गए, जहां पुलिस और कोतवताल विरोध नारे लगाए गए।