क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों के इलाज से मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। रानीगंज और दो दिन पहले तारानगर में हुई मौत के बाद अब मिर्जागंज गांव में एक बच्चे की झोलाछाप डॉक्टर के इलाज से मौत हो गई। वह डायरिया से पीड़ित था। परिवार वालों ने शव का अंतिम संस्कार कर दिया है।
गांव निवासी रामखेलावन डेढ़ साल के पुत्र छोटू की हालत बिगड़ने पर उसे शनिवार सुबह गांव के ही एक झोलाछाप डॉक्टर के पास इलाज के लिए ले गए थे। डॉक्टर ने छोटू को दवा देने के साथ ही एक इंजेक्शन भी लगाया। इसके बाद उसने शाम को फिर लाकर दिखाने की बात कही। डॉक्टर के कहने पर रामखेलावन अपने बेटे को लेकर घर चला गया। इसके थोड़ी देर बाद ही छोटू की हालत बिगड़ गई और कुछ ही देर बाद उसकी मौत हो गई। बच्चे की मौत से परिवार के लोगों में मातम पसर गया। परिवार वालों ने झोलछाप डॉक्टर के पास जाकर इंजेक्शन लगने के बाद बच्चे की मौत हो जाने की शिकायत करते हुए नाराजगी जताई। इसके बाद गांव में भीड़ जमा हो गई। लोगों ने भी झोलाछाप डॉक्टर की करतूत पर आक्रोश जताया। हालांकि बाद में गांव वालों के बीच में पड़ने की वजह से दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया। जिसके बाद परिवार वालों ने बच्चे के शव का अंतिम संस्कार कर दिया।
झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई की मांग
इंडियन रूरल चिकित्सा मित्र सोसायटी ने झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई की मांग की है। चिकित्सा मित्र सोसायटी के कार्यकर्ता 13 जुलाई को निघासन में एसडीएम को ज्ञापन देंगे।
चिकित्सा मित्र सोसायटी के कार्यकर्ता संदीप बरनवाल ने कहा कि सोसायटी झोलाछाप डॉक्टरों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग करती है। उन्होंने कहा, इन्हीं नीम हकीमों के कारण चिकित्सा मित्र बदनाम हो रहे हैं। बवासीर, भगंदर, नासूर, हार्निया, हाइड्रोसील जैसे रोगों की गारंटी के साथ इलाज करने वाले और ठेका लेने वाले लोग आम जनता को भ्रमित कर रहे हैं। उनकी वजह से चिकित्सा मित्र बदनाम हो रहे हैं। साइकिल पर दवा बांटने वाले तथा मेडिकल स्टोर के मालिक स्वयं डॉक्टरी करते हैं। उन्होंने कहा कि 13 वर्षों से श्रमजीवी सेवा संस्थान के अधिकृत चिकित्सा मित्रों से नाजायज पुलिसिया उत्पीड़न के विरोध में चिकित्सा मित्र 13 जुलाई को सुबह दस बजे एसडीएम को ज्ञापन देंगे। उन्होंने सभी चिकित्सा मित्रों से निघासन पहुंचने को कहा है।