रविवार सुबह शार्ट सर्किट से मेला मैदान में आग लगने से पांच दुकानें जलकर राख हो गईं। इस हादसे में लाखाें का नुकसान हुआ है। घंटों कड़ी मशक्कत के बाद आग पर किसी तरह काबू पाया जा सका।
मेला मैदान स्थित बाजार में राजय की संजय बर्तन भंडार, सुरेशचंद्र पांडे की सत्य ओम ट्रेडर्स नाम से हैंडलूम और गद्दे, कलीम की बिलाल हैंडलूम, वसीम की आलम गारमेंट और मुन्ना की बेल्ट और चश्मे की दुकानें हैं। बताते हैं कि सुबह साढ़े पांच बजे बिजली के शार्ट सर्किट से इन दुकानों में आग लग गई। इससे लाखों रुपये का सामान जलकर राख हो गया। सूचना पर मेला मैदान में लोगों की भीड़ एकत्र हो गई। फायर ब्रिगेड की गाड़ी दुकानों तक नहीं पहुंच सकी। इस पर नगर पालिका की टंकी के पास लगे फायर हायड्रेंट की सहायता से दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पाने की कोशिश की। यही नहीं दुकानों के पास नगर पालिका परिषद के बनवाए गए फव्वारे में भी पानी की सप्लाई शुरू कर दी गई। सूचना पर नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष मीनाक्षी अग्रवाल ने मौके पर पहुंचकर नगर पालिका से पानी भरी दो टंकियां मंगवाईं और पालिका कर्मचारियों को भी बुलवा लिया, यह लोग भी आग बुझाने में जुट गए। कोतवाल एके उपाध्याय के निर्देशन में दमकल कर्मियों के साथ नगर के तमाम लोगों और पुलिस ने भी आग बुझाने में मदद की। आग लगने के दो घंटे बाद लखीमपुर से भी फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियां पहुंची पर तब तक लोगों ने आग पर काफी हद तक काबू पा लिया। जानकारी मिलने पर पहुंचे सीएफओ ने भी मौका मुआयना किया। इस दौरान एसडीएम विनोद कुमार गुप्ता, सीओ मधुवन कुमार सिंह भी दिशा निर्देश देते रहे।
भीगते बुझाते रहे आग
गोला गोकर्णनाथ। मेला मैदान में तमाम अस्थाई खोखे काफी संकरी स्थिति में रखे हैं। सुबह बारिश होने के बावजूद लोग भीगते हुए आग बुझाने में लगे रहे। जरा भी लापरवाही होती तो मेला मैदान में सैकड़ों खोखे खाक हो सकते थे।
फटी थी पाइप लाइन, रिसता रहा पानी
गोला गोकर्णनाथ। आग बुझाने के लिए बिछाई गई कपड़े की पाइप लाइन कई जगह से फटी थी, जिसमें झिल्ली बांधकर जुगाड़ की गई। फटे पाइप से लगातार पानी निकलता रहा। फटे पाइप को देखकर लोग फायर ब्रिगेड की व्यवस्था को कोस रहे थे। लोगों का कहना था कि यदि पाइप लाइन सही होती तो आग पर जल्द काबू पाया जा सकता था।
तबाह हो गए दुकानदार
गोला गोकर्णनाथ। मेला मैदान में आग लगने से पांचों दुकानें राख हो गईं। पीड़ित दुकानदारों का कहना है कि होली पर उन्होंने किसी तरह कर्ज और उधार लेकर सामान भरा था, जिसके जल जाने से अब उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।