शहरी क्षेत्र की बिजली सप्लाई पर इन दिनों इमरजेंसी कटौती की जबरदस्त मार पड़ रही है। जिससे 15 घंटे बिजली मुहैया कराने का वादा न सिर्फ हवा-हवाई साबित हो रहा है, बल्कि इससे शहरवासियों की दिक्कतें लगातार बढ़ती जा रही हैं। बिजली न मिलने से पानी की सप्लाई लड़खड़ाई हुई है, वहीं लघु उद्योग धंधे भी बुरी तरह प्रभावित हो गई है। सबसे बुरा हाल बोर्ड परीक्षा की तैयारियों में जुटे विद्यार्थियों का है। अंधाधुंध बिजली कटौती होने से उनकी पढ़ाई नहीं पूरी हो पा रही है।
मौजूदा समय में शहरवासियों को 24 घंटे में महज 12 से 13 घंटे ही बिजली सप्लाई मिल रही है। दिन में कई चरणों में इमरजेंसी कटौती लागू होने से सात से आठ घंटे बिजली गुल हो जा रही है, वहीं रात में तीन से चार घंटे कटौती की जा रही है। बिजली न मिलने से नगर पालिका के नलकूपों से पानी की सप्लाई लड़खड़ा गई है, इससे शहरवासियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा रहा है। वहीं, बिजली किल्लत से शहर के लघु उद्योग धंधे भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। इनमें फोटो स्टेट की दुकानें, साइबर कैफे, ऑयल मिल, खराद कारोबार, पालेसर, आटा चक्की समेत कई अन्य व्यापार लगभग बंदी के कगार पर पहुंच रहे हैं। व्यापार मंडल (कंछल गुट) के जिला महामंत्री अशोक गुप्ता का कहना है कि बिजली के मामले जो हालात दस साल पहले थे, आज भी वही दिक्कतें बनी हुई हैं। इसमें सुधार के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है, जबकि इसका सबसे बड़ा असर व्यापारी वर्ग पर पड़ रहा है। वहीं व्यापार मंडल (मिश्रा गुट) के नगर महामंत्री उमेश शुक्ला का कहना है कि बिजली बिलों में जिस तरह इजाफा किया जा रहा है, सरकार को चाहिए कि उसी तरह बिजली सप्लाई में भी इजाफा करे, तभी उद्योग धंधों की सेहत सुधर सकती है। इधर, बिजली विभाग के अधिशाषी अभियंता रजनीकांत मिश्रा का कहना है कि शहर को रोस्टर के हिसाब से ही बिजली सप्लाई करने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन 132 केवी ग्रिड में लो वोल्टेज होने पर संसाधनों को बचाने के लिए इमरजेंसी कटौती करनी पड़ रही है। उम्मीद है जल्द ही बिजली सप्लाई में सुधार होगा।