जिले की नौ में से आठ चीनी मिलोें पर किसानों का बकाया बढ़ता जा रहा है, क्योंकि भुगतान की गति बहुत धीमी है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक आठ चीनी मिलों पर सात अरब 82 करोड़ 37 लाख 64 हजार रुपये (14 दिन पूर्व तक) बकाया है। इसमें पांच अरब 59 करोड़ से अधिक बकाया सिर्फ बजाज ग्रुप की तीन मिलों पर है, जिन्होंने दिसंबर 2014 के बाद खरीदे गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं किया है। किसानों की हालत पस्त हुई है, जिससे शादी-बीमारी के नाम पर पैसा लेने के लिए लाइन में लगना पड़ रहा है।
बजाज ग्रुप की गोला मिल ने 31 दिसंबर 2014 तक खरीदे गन्ना मूल्य का भुगतान किया है, जिससे इस मिल पर एक अरब 86 करोड़ 69 लाख 68 हजार रुपये बकाया है। पलिया मिल ने 17 दिसंबर 2014 तक भुगतान किया है, जिससे इस पर एक अरब 95 करोड़ 89 लाख 41 हजार रुपये बकाया हो चुका है। इसी तरह खंभारखेड़ा मिल ने 18 दिसंबर 2014 के बाद भुगतान नहीं किया है, लिहाजा इस पर एक अरब 76 करोड़ 62 लाख 99 हजार रुपये बकाया है। ऐरा मिल ने 29 जनवरी 2015 तक हुई खरीद का भुगतान किया है, जिससे इस पर 78 करोड़ 58 लाख 91 हजार रुपये बकाया हैै। इसी तरह कुंभी मिल पर 26.21 करोड़, गुलरिया मिल पर 27.08 करोड़, बेलरायां मिल पर 44.76 करोड़ और संपूर्णानगर मिल पर 46.49 करोड़ रुपये बकाया है।
बकाया देनदारी पर 17.10 करोड़ का ब्याज
गन्ना एक्ट के मुताबिक गन्ना खरीद की तिथि से 14 दिन के अंदर भुगतान करना अनिवार्य है, जिसके बाद किसानों को ब्याज दिए जाने का भी प्रावधान है। लिहाजा आठ मिलों पर बकाया गन्ना मूल्य के चलते 17 करोड़ 10 लाख 81 हजार का ब्याज भी ड्यू हो गया है। गन्ना विभाग इसका भी आंकलन कर रहा है।
सभी मिलों के अध्यासियों को नोटिस जारी की है। इस संबंध में बैठक कर जीएम शुगर केन को निर्देश दिए गए हैं। डीएम समेत गन्ना आयुक्त को सभी मिलों के स्टेट्स से अवगत कराया गया हैै।
-जगदीश चंद्र यादव, जिला गन्ना अधिकारी