रानीगंज के झोलाछाप से गोबिंदपुर फार्म निवासी काला सिंह (65) ने हार्निया का आपरेशन कराया तो उनकी जान चली गई। गुस्साए लोगों ने क्लीनिक पर पहुंचकर हंगामा किया, लेकिन इस बीच शुक्रवार को रात के अंधेरे में आरोपी डॉक्टर भाग निकला। पुलिस फरार डॉक्टर की तलाश कर रही है, लेकिन मामले की रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई है। पंद्रह दिनों में झोलाछाप डॉक्टर के इलाज से मौत का यह तीसरा मामला है।
क्षेत्र के गोबिंदपुर फार्म निवासी काला सिंह (65) हार्निया से पीड़ित थे। मृतक के पुत्र मंगू के अनुसार गांव रानीगंज में हरनाम बोझिया निवासी झोलाछाप डॉक्टर ने रामचंद्र के यहां क्लीनिक खोल रखा है। वह आंत, पित्त, हाइड्रोसील, कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज का ठेका लेता है। उसने काला सिंह से 10 हजार रुपये में ऑपरेशन कर उसे ठीक करने का ठेका ले लिया। आरोप है कि शुक्रवार की शाम डॉक्टर ने उन्हें बेहोश कर ऑपरेशन कर दिया, लेकिन काला सिंह दोबारा होश में नहीं आए। गुस्साए लोगों ने झोलाछाप डॉक्टर की घेराबंदी की, लेकिन रात के अंधेरे का फायदा उठाकर वह भाग निकला। लोगों ने हंगामा किया, लेकिन पुलिस के समझाने पर सभी शांत हो गए। उधर पुलिस ने अभी तक मामले की रिपोर्ट दर्ज नहीं की है।
उध्ार इस बाबत एसओ परशुराम ने बताया कि मामले की तहरीर नहीं मिली है। परिवार वालों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से इनकार करते हुए लिखकर दे दिया है। जिस पर पंचनामा भरकर शव उनके सुपुर्द कर दिया गया है। फिलहाल मामले की जांच के बाद कथित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सीएमओ-खीरी डॉ. वीके साहू ने बताया कि निघासन क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टर के इलाज से कई मौतें हो चुकी हैं। सीएचसी प्रभारी को अभियान चलाकर झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा गया है।
झोलाछापों ने ली 15 दिन में तीन जानें
झोलाछाप डॉक्टर के इलाज से 15 दिनों में तीन मौतें हो चुकी हैं, लेकिन किसी भी मामले में कोई भी कार्रवाई नहीं हुई। यहां तक कि यह कथित डॉक्टर गले में आला लटकाकर किसी भी समय गांव में अपनी चलती फिरती दुकान लेकर देखे जा सकते हैं।
पहली मौत गांव रकेहटी निवासी शांती देवी की पांच जून को हुई थी। वह पेट दर्द से परेशान होकर डॉ. पीके विश्वास के पास गईं और इंजेक्शन लगने के बाद चल बसीं। ग्रामीणों के हंगामे के बाद पुलिस ने झोलाछाप डॉक्टर पीके विश्वास के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज तो कर ली, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की। इसी तरह 14 जून को सिंगाही थानाक्षेत्र के गांव सिन्हौंना निवासी रमाकांत के बुखार आया। परिवार वाले उसे लेकर गांव के ही एक झोलाछाप डॉक्टर के यहां पहुंचे। डॉक्टर के दवा देते ही उसकी मौत हो गई। पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज नहीं की। तीसरी मौत गांव ब्रिजापुरवा निवासी रतीराम की हुई। वह 22 जून को कस्बे में किसी काम से आए थे। अचानक सीने में दर्द उठने के कारण वह टांडा पुलिया के पास स्थित झोलाछाप बंगाली डॉक्टर के पास पहुंचे। डॉक्टर के इंजेक्शन लगाते ही उनकी मौत हो गई। अब रानीगंज निवासी काला सिंह की मौत भी डॉक्टर के इलाज से हुई।