दहेज की मांग के चलते विवाहिता को मौत के मुंह में धकेलने के मामले में पति समेत पांच ससुरालीजनों को दोषी पाया गया है। एडीजे बाबूराम ने दहेज हत्या के लिए दोषी पाए गए पति, जेठ, जेठानी और सास-ससुर को दस वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही सभी पर 13-13 हजार रुपये का जुर्माना भी डाला है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए एडीजीसी रमेश प्रसाद गुप्ता ने बताया कि पड़ोसी जिले शाहजहांपुर के खुटार कस्बे के फकीरे ने अपनी लड़की नन्हीं देवी की शादी शहर के मुहल्ला शिव कॉलोनी निवासी वीरेंद्र के साथ वर्ष 2011 में की थी। आरोप है कि दहेज में 50 हजार रुपये की नकदी और मोटर साइकिल की मांग के चलते विवाहिता को परेशान किया जाने लगा। इसी कड़ी में 28 जुलाई 2012 को नन्हीं देवी की लाश उसकी ससुराल में फांसी के फंदे पर लटकती मिली। इसी मोहल्ले में ब्याही विवाहिता की बहन, बड़ी बिटिया बहन को फंदे से उतारकर अस्पताल ले गई तो वहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। केस के समर्थन में फकीरे, बड़ी बिटिया, मिंटू, निर्मला, एसओ चंद्रशेखर सिंह, एसआई विवेक शर्मा और सीओ अखिलेश नरायन सिंह की गवाही पेश की गई तो बचाव पक्ष की ओर से विक्की देवी और रहमतुल्ला की गवाही दर्ज कराई। सुनवाई के बाद अदालत ने सभी पांचो आरोपियों को दहेज हत्या के लिए दोषी पाते हुए 10-10 वर्ष के कठोर कारावास और 13-13 हजार रुपये का जुर्माना भरने की सजा सुनाई है। इस जुर्माने की राशि में से पीड़ित पक्ष को 20 हजार रुपये मुआवजे के रूप में दिए जाने के आदेश दिए।