एक गर्भवती को सीएचसी में भर्ती नहीं किया गया। शुक्रवार आधी रात को अस्पताल लाई गई प्रसूता को 108 एंबुलेंस में ही स्टॉफ नर्स ने देखकर जिले पर ले जाने के लिए कह दिया। लखनऊ ले जाते समय प्रसूता की रास्ते में ही मौत हो गई।
रागनगर कलां निवासी वीरेंद्र की दो साल पहले शादी हुई थी। वीरेंद्र की पत्नी रूबी गर्भवती थी। शुक्रवार रात करीब 12 बजे रूबी की तबियत बिगड़ने पर उसे 108 एंबुलेंस से बिजुआ सीएचसी लाया गया। सीएचसी में मौजूद मेडिकल स्टॉफ ने प्रसूता को एंबुलेंस में ही देखकर भर्ती करने से मना कर दिया। वीरेंद्र के मुताबिक उसने डॉक्टर को बुलाने की गुजारिश की, लेकिन स्टॉफ ने डॉक्टर को बुलाना तक जरूरी नहीं समझा। बिना रेफर पर्चा 108 एंबुलेंस ले जाने को तैयार नहीं हुई। वीरेंद्र का आरोप है कि एंबुलेंस वालों ने उससे पैसों की मांग की। एंबुलेंस न ले जाने से मरीज को अपने वाहन से लखीमपुर ले गए। बताते हैं कि जिला अस्पताल में मरीज को नहीं लिया गया। वीरेंद्र अपनी पत्नी को एक प्राइवेट अस्पताल से रेफर कराकर प्राइवेट वाहन से लखनऊ ले जा रहा था, तभी रास्ते में मौत हो गई। प्रसूता की मौत की सूचना पर पुलिस ने नायब तहसीलदार को सूचना दी। जिस पर नायब तहसीलदार रामदेव निषाद ने शव का पंचनामा भरा है।