फूलबेहड़ थाना क्षेत्र के रेहुआ जंगल में हुए शेखर वर्मा हत्याकांड मामले में पुलिस ने क्राइम ब्रांच की मदद से खुलासा कर दिया है, जिसमें बहनोई ने ही भाड़े के हत्यारों से साले का कत्ल कराया था। हत्या के पीछे बहनोई की बहन से प्रेम संबंध और संपति का लालच सामने आया है। मुख्य आरोपी बहनोई ने 40 हजार रुपये में साले के कत्ल का सौदा तय किया था, जिसमें वारदात से पहले 20 हजार रुपये एडवांस में दिए गए थे।
बता दें कि खीरी थाना के गांव मूूसेपुर निवासी कमलेश कुमार वर्मा का एकलौता पुत्र 22 वर्षीय शेखर वर्मा 16 फरवरी 2016 को घर से निकला था, जिसके बाद दूसरे दिन फूूलबेहड़ क्षेत्र के रेहुआ जंगल में उसका शव मिला था। हत्यारों ने उसके गले में गमछा कसकर उसकी हत्या कर दी थी। फिर शव की पहचान मिटाने के लिए दरिंदगी से सिर और चेहरे को ईंट से चोट पहुंचाई गई थी। एसपी अखिलेश चौरसिया ने हत्याकांड के खुलासे के लिए एएसपी एपी सिंह और सीओ धौरहरा मनोज यादव के नेतृत्व में एसओ फूलबेहड़ और क्राइम ब्रांच को लगाया था। एसपी अखिलेश चौरसिया ने पत्रकारों को बताया कि फूलबेहड़ पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने सुरागरसी के सहारे सोमवार को टेढ़ुई तिराहे से चारों हत्यारोपियों को पकड़ने में सफलता प्राप्त की। अभियुक्तों की पहचान अमरजीत सिंह निवासी गरकटीया थाना कोतवाली सदर, रफीक निवासी हाजीपुर महेवागंज, मुनीर खां निवासी पड़रिया कला थाना फरधान और रफीक उर्फ भूरे निवासी छोलना महेवागंज के तौर पर हुई। इनकी निशानदेही पर घटना में प्रयोग किया गया आला कत्ल ईंट का टुकड़ा और सुपारी के 15 हजार रुपये बरामद किए गए हैं। एसपी ने बताया कि हत्याकांड में मुख्य अभियुक्त मृतक शेखर का बहनोई अमरजीत है, जिसने स्वीकार किया है कि शेखर का उसकी बहन से प्रेम संबंध था। इससे वह अपने साले शेखर से नाराज था। हालांकि कड़ाई से पूछताछ में मुख्य आरोपी अमरजीत ने बताया है कि उसकी नजर ससुर की अचल संपत्ति पर थी, जिसको लेकर उसने शेखर की हत्या का प्लान बनाया था। इसमें शातिर अपराधी रफीक, मुनीर खां और भूरा उर्फ रफीक को शामिल कर हत्या करने की सुपारी 40 हजार रुपये दी। इसके बाद प्लानिंग के मुताबिक 16 फरवरी 2016 को चारों आरोपियों ने मिलकर रेहुआ जंगल में शेखर की हत्या कर दी।
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दूसरों को फंसाने की चाल से हुए बेनकाब
हत्या के बाद अपराधियों तक पहुंचने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी, क्योंकि हत्यारों ने पुलिस के गुमराह करने के लिए घटनास्थल पर एक मोबाइल छोड़ा था। शातिर अपराधियों ने मोबाइल में अपने दुश्मनों को फंसाने के लिए तीन नंबर और नाम फीड कर दिए थे। जब पुलिस ने जांच पड़ताल शुरू की, तो वे निर्दोष निकले। वहीं दूसरे को फंसाने के लिए प्रयोग किया गया मोबाइल अपराधियों को बेनकाब करने में मददगार साबित हुआ।
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तमंचा दिखाने के बहाने बुलाया था जंगल
पूछताछ में हत्यारोपियों ने बताया कि रफीक ने पप्पू नाम से शेखर को फोन कर तमंचा बेचने का आफर दिया था, जिसके बाद उसे रेहुआ जंगल में तमंचा दिखाने के लिए बुलाया था। शेखर अपराधियों की चाल समझ नहीं सका।
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टीम में ये रहे शामिल
इस खुलासे में एसओ फूलचंद, एसआई सुरेश मौर्या, क्राइम ब्रांच एसआई अजय यादव, एसआई प्रमोद मिश्रा, सिपाही राकेश कुमार, धर्मपाल सिंह, जितेंद्र गौड़, शराफत, वसीम, यज्ञनारायण मिश्रा, शेखर सिंह, अजेंद्र यादव शामिल रहे।