थाना पुलिस ने अंडमान निकोबार के एक नटवरलाल को गिरफ्तार किया है। उसने क्षेत्र में खुद से 30 हजार रुपये लूटे जाने की बात कहकर पुलिस पर पत्रकार होने का रौैब गांठा, साथ ही अपने को उच्चाधिकारियों का रिश्तेदार बताकर पुलिस को दबाव में लेने का प्रयास कर रहा था। एसओ रामऔतार यादव का माथ ठनका औैर पूरे मामले की जांच की तो हकीकत कुछ और ही निकली। पुलिस ने उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर चालान भेजा है।
एसओ रामऔतार यादव ने बताया कि शुक्रवार की दोपहर एक युवक थाने पर आया और इंग्लिश में बातचीत करते हुए बताया कि उसका नाम पीकेएस मूर्ति पुत्र राममूर्ति है और वह अंडमान निकोबार के थाना मायाबंदर के गांव विजयनगर का निवासी है। उसने पुलिस को बताया कि कुछ बदमाशों ने चाकू दिखाकर उससे 30 हजार रुपये और सामान लूट लिया है। वह घटनास्थल का नाम नहीं बता पाया, जिसके बाद वह पुलिस को लेकर नेशनल हाइवे स्थिल चपरतला गांव के पास पहुंचा। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर लोगों से जब घटना के बारे में विस्तृत पूछताछ की तो घटना संदिग्ध लगी। पुलिस ने युवक से सख्ती से पूछताछ करते हुए उसके बारे में पड़ोस के जनपदों में जानकारी की तो पता चला कि यह युवक पिछले कई वर्षों से थानों पर जाकर पुलिस को अपना परिचय पत्रकार के रूप मेें देकर खुद के साथ लूट की बात बताता था। साथ ही उच्चाधिकारियों को अपना रिश्तेदार बताकर दबाव बनाता और मुकदमा लिखने से बचाने के नाम पर पुलिस से रुपये ऐठ लेता था।
एसओ रामऔतार यादव ने बताया कि वह ट्रेन से दिल्ली से आया था, शाहजहांपुर
होते हुए शुक्रवार को मैगलगंज पहुंचा था। उसके विरुद्ध सुसंगत धाराओं में
मुकदमा दर्ज कर चालान भेजा गया है।
सीतापुर में भी पुलिस से किया था ठगी का प्रयास
पकडे़ गए युवक के विरुद्ध सीतापुर जनपद के मिश्रिख कोतवाली में 2010 में जालसाजी का मुकदमा दर्ज हुआ था। इस मामले में वह तीन वर्ष बाद जेल से छूटा था। इसके अलावा हरदोई जनपद के पाली थाना क्षेत्र में भी ऐसा मामला सामने आया था।
कई भाषाएं बोलने में माहिर
पुलिस ने बताया है कि पकड़ा गया युवक इंग्लिश के अलावा हिंदी, कन्नड़, तमिल सहित कई क्षेत्रीय भाषाएं बोलने में माहिर है। वह गाइड का काम भी कर चुका है।
पुलिस की कमजोर नस दबाकर करता था ठगी
पूछताछ के दौरान युवक ने बताया है कि लूट के मामले में अक्सर पुलिस मुकदमा लिखने से कतराती है। वह 10 से 30 हजार रुपये तक लूट की बात बताता था, जिसके बाद पुलिस उसे मैनेज करने का प्रयास करती थी। लूट की रिपोर्ट लिखने के बजाय उसे कुछ रुपये देकर पुलिस अपना पीछा छुड़ा लेती थी।