दो साल पहले छोटे भाई ने की थी मंझले भाई की हत्या
गांव गंगापुरवा में डेढ़ बीघा भूमि के कारण सगे भाई एक दूसरे के खून के प्यासे बन बैठे। डेढ़ बीघा भूमि के विवाद के चलते दो साल पहले छोटे भाई कैलाश चंद और उसकी पत्नी कांती देवी ने मिलकर मंझले भाई रामजीवन की हत्या कर दी। दोनों हत्याकांड में जेल चले गए। उसके बाद जब कांती जेल से छूटकर आई तो वह आपस में सुलह करना चाहती थी, लेकिन मंझले भाई रामजीवन का पुत्र सतीश और उसकी पत्नी कोकिला डेढ़ बीघा जमीन चाहती थी। जमीन देने से मना करने से नाराज सतीश और उसकी मां ने मिलकर कांती देवी को मौत के घाट उतार दिया।
गांव गंगापुरवा निवासी बाबूराम के तीन पुत्र प्यारेलाल, रामजीन और कैलाश चंद थे। करीब 15 साल पहले तीनों भाइयों में बंटवारा हो गया। बाबूराम ने साढ़े तीन बीघा जमीन को छोड़कर सारी जमीन तीनों बेटों में बांट दी। बाबूराम छोटे बेटे कैलाश चंद्र के साथ रहने लगे। आरोप है कि बाबूराम ने अपने हिस्से की साढ़े तीन बीघा बाग वाली जमीन बेंचकर कैलाश को डेढ़ बीघा जमीन खरीद दी। जमीन बिक्री का बचा हुआ पैसा कैलाश चंद्र को दे दिया। रामजीवन डेढ़ बीघा जमीन में हिस्सा चाहता था, लेकिन इस दौरान बाबूराम की बीमारी के चलते मौत हो गई। पिता की मौत के बाद डेढ़ बीघा जमीन को लेकर रामजीवन और कैलाश चंद में झगड़ा होने लगा। 16 फरवरी 2015 को जब रामजीन खेत में काम करने गया। वहां पर पहले से ही खेत में काम कर रहे कैलाश चंद और उसकी पत्नी कांती देवी से विवाद होने लगा। आरोप है कि कांती देवी ने अपने जेठ रामजीवन की हंसिए से प्रहार कर घायल कर दिया और कैलाशचंद ने बगौड़ी से प्रहार कर मौत के घाट उतार दिया। इस हत्याकांड में दोनों जेल गए। कांती देवी करीब एक साल पहले जमानत पर छूटकर घर आई थी। परिवार का मामला होने के कारण वह आपस में सुलह चाहती थी। आरोप है कि हत्यारोपी डेढ़ बीघा जमीन में हिस्सा चाहता था, जिसे मृतका देना नहीं चाहती थी। इसीलिए हत्यारोपियों ने अपनी चाची कांती को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया।
डेढ़ माह पहले जान से मारने की दी थी धमकी
गीता देवी ने बताया कि उसकी मां कांती देवी और पिता कैलाश चंद्र दो साल पहले ताऊ रामजीवन की हत्या में जेल गए थे। कांती देवी एक साल पहले जमानत पर छूटकर घर आईं थीं। कैलाशचंद्र अब भी जेल में है। करीब डेढ़ माह पहले हत्याआरोपी सतीश ने कांती देवी को जान से मारने की धमकी दी थी। आरोप है कि सतीश ने अपने पिता की मौत का बदला लेने के लिए कसम भी खाई थी।
परिवार वालों का रोरोकर बुरा हाल
मृतका कांती देवी के अंकित, अनुराग, गायत्री, गंगोत्री, गीता और शालिनी हैं। पिता कैलाशचंद्र पहले से ही जेल में था। पूरे परिवार की जिम्मेदारी अंकित पर थी। किसी तरह से वह मेहनत मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पाल रहा था। मां की मौत से परिवार में कोहराम मचा हुआ था।
सुलह करना चाहती थी मृतका
गीता देवी ने बताया कि उसकी मां कांती देवी बड़ी मां कोकिला और चचरे भाई सतीश से सुलह करना चाहती थी। वह सुलह के लिए लोधपुरवा निवासी नजूप व अन्य कई लोगों से कहा था। आरोप है कि सतीश सुलह करने के लिए तैयार नहीं था।