लखीमपुर खीरी।लखनऊ में मृत घोषित युवक के जिंदा होने के शक में परिवार वाले उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने लाश होने की बात कहकर हाथ लगाने से मना कर दिया। इससे गुस्साए परिवार वालों ने हंगामा शुरू कर दिया। नतीजतन युवक को जीवित और मृत घोषित करने के लिए सीएमएस को पांच डॉक्टरों की टीम लगानी पड़ी। वहीं घरवालों को समझाने के लिए एडीएम को भी अस्पताल जाना पड़ा।
कलक्ट्रेट में असलहा बाबू सुरेश वर्मा का 21 वर्षीय पुत्र उत्कर्ष वर्मा लखनऊ में रहकर पालीटेक्निक कर रहा था। बताते हैं कि शनिवार को वह प्रयोगात्मक परीक्षा देने जा रहा था। रास्ते में अचानक तबीयत खराब होने पर वह एक दुकान पर बैठ गया और इसकी जानकारी अपने मित्रों को दी। उधर, उत्कर्ष की तबीयत जब बिगड़ने लगी तो दुकानदार ने 108 से उसे बलरामपुर अस्पताल भिजवा दिया।
बताते हैं वहां पर डॉक्टरों ने उसे अपराह्न तीन बजे मृत घोषित कर दिया। इस पर घरवाले उत्कर्ष का शव लेकर अपने गांव अटनहिया लौटने की तैयारी करने लगे। रविवार की सुबह रास्ते में करीब 8.30 बजे उत्कर्ष के शरीर में अचानक हलचल होने का एहसास घरवालों को हुआ, जिस पर वह सीधे जिला अस्पताल पहुंच गए, जहां ईएमओ डॉ. मोहित तिवारी ने युवक को मृत बता दिया, लेकिन घरवालों उसके जिंदा होने की बात कहते हुए हंगामा करने लगे। इस पर डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने सीएमएस को फोन कर उत्कर्ष को दिखवाने के निर्देश दिए। जिस पर सीएमएस डॉ. अरूण कुमार गौतम ने डॉ. आरएस मधौरिया, सर्जन डॉ. सतीश कुमार, डॉ. अखिलेश वर्मा, डॉ. संतोष मिश्रा को मौके पर भेजा। सभी ने युवक की जांच की और अंतत: मृत ही बताया। मामले की सूचना पर एडीएम उमेश नरायण पांडे और सदर एसडीएम नागेंद्र सिंह ने अस्पताल पहुंचकर घरवालों को ढांढस बंधाया। तब जाकर कहीं मामला शांत हुआ।
मृतक को देख डॉक्टर ने हकीकत बता दी थी, लेकिन घरवाले संतुष्ट नहीं थे। वह उसके जिंदा होने का दावा कर रहे थे। परिवार वालों की भावनाओं को देखते हुए डॉक्टरों की टीम से पड़ताल कराई गई, जिसके बाद परिवार वाले संतुष्ट हो गए और शव को वापस ले गए।
- डॉ. संतोष मिश्रा, प्रशासनिक अधिकारी जिला अस्पताल