शहर के नामचीन डॉन बॉस्को स्कूल के एक कक्षा 11 के छात्र ने शनिवार को स्कूल की बिल्डिंग से कूदकर आत्महत्या करने की कोशिश की, हालांकि क्लास टीचर ने उसे कूदने से पहले ही दबोच लिया, जिससे उसकी जान बच गई। क्लास टीचर की मेज के पास छोड़े गए सुसाइड नोट में छात्र ने अपने माता-पिता के समय न देने की बात कही है। पुलिस ने सुसाइड नोट कब्जे में ले लिया है। स्कूल प्रशासन की लिखित सूचना पर पुलिस ने माता-पिता को बुलाकर छात्र को सौंप दिया।
शहर निवासी एक 14 वर्षीय किशोर डॉन बॉस्को स्कूल में कक्षा 11 का छात्र है। शनिवार की दोपहर 12 बजे के करीब छात्र ने पहले एक सुसाइड नोट क्लास टीचर की मेज के पास डाल दिया और जान देने की धमकी देते हुए छत से कूदने की कोशिश की, हालांकि क्लास टीचर ने तत्परता दिखाई और उसे कूदने से पहले ही दबोच लिया। इस घटना की जानकारी जब स्कूल प्रशासन को हुई तो हड़कंप मच गया। स्कूल प्रशासन ने घटना की सूचना कोतवाली सदर पुलिस को दी।
सूचना पर चौकी इंचार्ज रोडवेज रामबक्श स्कूल पहुंचे और मामले की जांच की। स्कूल प्रशासन ने घटना की लिखित सूचना सदर कोतवाली पुलिस को दी। सदर कोतवाल दीपक शुक्ल ने बताया कि मौके पर छात्र द्वारा फेंके गए सुसाइड नोट को पुलिस ने कब्जे में ले लिया है। सुसाइड नोट में छात्र ने लिखा है कि उसके माता-पिता उसे समय नहीं देते हैं। इसलिए वह आत्महत्या करने जा रहा है। उन्होंने बताया कि स्कूल प्रशासन की लिखित सूचना पर माता-पिता को कोतवाली बुलाया गया, बाद में छात्र को उन्हें सौंप दिया गया है।
अफवाहों से परेशान रही पुलिस
छात्र के आत्महत्या करने की कोशिश की खबर सोशल मीडिया पर एक अफवाह के रूप में वायरल कर दी गई। खबर में बताया गया कि ब्लू व्हेल गेम खेलने के कारण छात्र ने आत्महत्या की कोशिश की। इससे पुलिस अधिकारियों तक से लोग जानकारी करने लगे। हालांकि बाद में हकीकत सामने आने पर सब कुछ शांत हो गया।
किशोरावस्था में बच्चों से रखें दोस्ताना संबंध
आत्महत्या का प्रयास करने वाला बच्चा किशोरावस्था से गुजर रहा है। ऐसे समय माता-पिता को अपने बच्चों से दोस्ताना संबंध बनाना चाहिए ताकि बच्चा अपनी हर बात को उनसे साझा कर सके। माता-पिता के ध्यान न देने पर बच्चा हीनभावना से ग्रसित हो जाता है। ऐसे में वह या तो अंतरमुखी हो जाता है या आक्रामक। आक्रामक होने की दशा में वह दूसरों को भी नुकसान पहुंचा जा सकता है। ऐसा करने में सक्षम न होने पर वह खुद को नुकसान पहुंचा लेता है। संभवत: इस बच्चे के साथ ऐसा ही कुछ हुआ है, जैसे कि उसके सुसाइड नोट से भी प्रतीत होता है।
- डॉ. अन्नपूर्णा गुप्ता, विभागाध्यक्ष मनोविज्ञान
भगवानदीन आर्यकन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय लखीमपुर खीरी।