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वीडीओ पर फरधान में भी दर्ज हुई रिपोर्ट

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वीडीओ पर फरधान में भी दर्ज हुई रिपोर्ट
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फरधान। बेहजम ब्लॉक में तैनात ग्राम विकास अधिकारी कमाल अहमद की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। थाना नीमगांव के बाद अब उनके खिलाफ थाना फरधान में गबन की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। आरोपी वीडीओ पर ग्राम पंचायतों के ग्रामनिधि खातों से 26.30 लाख रुपयों के गबन का आरोप है।
एडीओ पंचायत अजय प्रकाश त्रिवेदी ने बताया डीपीआरओ चंद्रिका प्रसाद के आदेश पर ग्राम पंचायत गौरिया के ग्राम निधि खाते से 6.38 लाख रुपये गबन करने की रिपोर्ट वीडीओ कमाल अहमद के खिलाफ दर्ज कराई गई है। इसके पहले नीमगांव थाने में प्रतापपुर, मिर्जापुर और भूलनपुर ग्राम पंचायतों के ग्रामनिधि खातों 16 लाख के गबन की रिपोर्ट दर्ज कराई जा चुकी है। हालांकि गबन के आरोपी ग्राम विकास अधिकारी पर अभी तक कोई अनुशासनिक कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने बताया कि 26 जून 2018 को बेहजम ब्लॉक के गांव अतरौली निवासी आलोक कुमार अवस्थी ने वीडीओ कमाल अहमद पर लाखों रुपये के गबन का आरोप लगाते हुए सीडीओ रवि रंजन से शिकायत की थी। सीडीओ ने बेहजम ब्लॉक के बीडीओ और एडीओ पंचायत से मामले की रिपोर्ट मांगी थी, जिससे पता चला गौरिया, भूलनपुर, प्रतापपुर, मिर्जापुर, अछनिया, हसनापुर ग्राम पंचायतों के ग्रामनिधि खाते से फरवरी से जून 2018 में 57.4 लाख रुपये निकाले गए है। इसके बाद सीडीओ ने तीन सदस्यीय कमेटी बनाकर मामले की जांच कराई तो पता चला उक्त ग्राम पंचायतों के खातों से निकाले गए 57.4 लाख रुपयों में 22 लाख 41 हजार 222 रुपये बगैर वर्क आईडी के आहरित कर लिए गए है। गबन का मामला सामने आने के बाद सीडीओ के निर्देश पर डीपीआरओ चंद्रिकाप्रसाद ने आरोपी सचिव कमाल अहमद के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का 29 दिसम्बर 2018 को आदेश जारी किया था, जिसके बाद एडीओ अजय प्रकाश त्रिवेदी ने नीमगांव थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद अब बुधवार को फरधान थाने में भी रिपोर्ट दर्ज कराई है।
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आखिर वीडीओ पर ही कार्रवाई क्यों?
गौरिया, भूलनपुर, प्रतापपुर, मिर्जापुर, हसनापुर पंचायतों के ग्रामनिधि खातों से कुल 26.30 लाख का घपला सामने आया है। ग्रामनिधि खाता सचिव और ग्राम प्रधान द्वारा संयुक्त रूप से संचालित होता है। इन ग्राम पंचायतों में लाखों रुपये के गबन में केवल सचिव के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई है, जबकि संयुक्त खाता होने के कारण संबंधित प्रधान भी बराबर का दोषी है। बेशक ग्राम सचिव सरकारी सेवक होता है और प्रधान जनप्रतिनिधि, लेकिन खाता दोनों के नाम से संचालित होता है। अगर खाते से गबन हुआ तो दोनों की संलिप्तता सुनिश्चित होती है, लेकिन विभाग की तरफ से दी गई तहरीर में प्रधानों का जिक्र तक नहीं किया गया। आखिर ऐसा क्यों? क्या संबंधित ग्राम पंचायतों के प्रधान लाखों धन के हुए दुरुपयोग में जिम्मेदार नहीं है।
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