खमरिया (लखीमपुर खीरी)।
गांव लाखुन निवासी छात्र कपिल जायसवाल की मौत की सूचना जब कॉलेज से गांव पहुंची तो गांव में भी सन्नाटा पसर गया। छात्र के खुदकशी करने से उसके साथी भी काफी आहत हैं। पोस्टमार्टम के बाद शाम को गांव पहुंचे शव को देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
गांव लाखुन निवासी सुशील कुमार ने बताया कि उनके पिता रामशंकर जायसवाल किसान थे। वह दो भाई हैं, जिनमें कपिल छोटा था। 20 साल पहले मां का बीमारी के चलते निधन हो गया था। इसके बाद पांच साल पहले पिता का भी साया उठ गया। उन्होंने बताया कि कई साल से भाई सिर दर्द से परेशान रहता था। पढ़ने में काफी अच्छा होने के कारण वह भी उसकी पूरी मदद करते थे। उसका बेहतर इलाज भी करवा रहे थे, लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। उसका भाई अब दुनियां से चला गया।
उधर, सुबह जब साथी छात्रों को कपिल के फांसी लगाकर आत्महत्या करने की जानकारी हुई तो किसी को भी एक बार में विश्वास नहीं हुआ। छात्र की मौत से कॉलेज से लेकर गांव तक मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है। शुक्रवार की शाम पोस्टमार्टम के बाद जब शव गांव पहुंचा तो बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुट गई। लोग बिलख रहे परिवार वालों को ढांढस बंधा रहे थे।
बीमारी और अकेलापन
हो सकता है वजह
चूंकि छात्र को सिरदर्द की समस्या थी। लंबे इलाज के कारण अक्सर मरीज डिप्रेशन में चले जाते हैं। ऐसे में यदि वह परिवार से दूर रहते हैं तो किसी से अपनी पीड़ा भी नहीं बता पाते। यही वजह है कि वह जिंदगी से ऊब जाते हैं और आत्महत्या जैसा कदम उठा लेते हैं। छात्र के मामले में भी ऐसा लग रहा है।
- डॉ दिनेश दुआ, वरिष्ठ मनोचिकित्सक
केवल सिरदर्द आत्महत्या का कारण नहीं हो सकता। पारिवारिक कारणों से अवसाद के चलते आत्महत्या का मामला हो सकता है। युवाओं को कभी अकेला नहीं छोड़ना चाहिए और उन्हें लक्ष्य को लेकर प्रेरित करना चाहिए।
- डॉ. अन्नपूर्णा गुप्ता, विभागाध्यक्ष मनोविज्ञान, भगवानदीन आर्य कन्या महाविद्यालय लखीमपुर